पुलिस के मन में भी बसता है एक संवेदनशील इंसान… जशपुर में हेलमेट बैंक के रूप में दिखी खाकी की मानवीय सोच
छत्तीसगढ़ – जशपुर – आमतौर पर पुलिस की वर्दी को कानून, अनुशासन और कार्रवाई का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस वर्दी के भीतर भी एक संवेदनशील इंसान बसता है, जिसके मन में दूसरों की जिंदगी बचाने का जज्बा और समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी होती है। जशपुर पुलिस की ‘हेलमेट बैंक’ पहल इसी मानवीय संवेदना की जीवंत मिसाल है। यह पहल बताती है कि खाकी का एक चेहरा ऐसा भी है, जो चालान काटने से पहले किसी की जिंदगी बचाने की चिंता करता है।
इस सोच को जमीन पर उतारने का श्रेय जशपुर के डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह को जाता है। उनकी दूरदर्शी सोच और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता ने पुलिसिंग को जनसेवा के एक नए आयाम से जोड़ा है। उन्होंने समझा कि सड़क दुर्घटना में सिर पर हेलमेट न होना केवल एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों पर भारी पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुलिस लाइन जशपुर में फीता काटकर हेलमेट बैंक का शुभारंभ किया और नागरिकों को हेलमेट वितरित किए।
इस बैंक के माध्यम से आकस्मिक जरूरत या आर्थिक परेशानी में फंसे दोपहिया चालकों को पुलिस अस्थायी रूप से हेलमेट उपलब्ध कराएगी। बाद में अपना हेलमेट खरीदकर वे इसे लौटा सकेंगे और जनजागरूकता अभियान में सहभागी बनेंगे।
डॉ. लाल उमेद सिंह की यह पहल वास्तव में सराहना से बढ़कर अनुकरण की पात्र है। यह पुलिस की संवेदनशीलता, सामाजिक सरोकार और जीवन के प्रति सम्मान का संदेश है। क्योंकि किसी के सिर पर हेलमेट होना केवल यातायात नियम का पालन नहीं, किसी मां की ममता, किसी बच्चे का भविष्य और किसी परिवार की मुस्कान सुरक्षित रखना है।





