हाईमास्ट लाइट की चमक के पीछे भ्रष्टाचार का अंधेरा! लाखों खर्च, फिर भी शहरों में अंधेरा कायम
छत्तीसगढ़ में सरकार किसी भी दल की हो, हाईमास्ट लाइट लगाने का शौक वर्षों से बदस्तूर जारी है। इन लाइटों के जगमगाने पर शहरों और चौक-चौराहों की खूबसूरती देखते ही बनती है। शासन की मंशा भी सराहनीय है, क्योंकि रोशनी से न केवल सौंदर्य बढ़ता है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा भी सुनिश्चित होती है।
लेकिन सवाल यह है कि लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई हाईमास्ट लाइटें आखिर कुछ ही महीनों में दम क्यों तोड़ देती हैं? जिस खंभे से कभी चारों दिशाओं में रोशनी फैलती थी, वही आज भ्रष्ट व्यवस्था और लापरवाही का शोपीस बनकर खड़ा है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक यही तस्वीर दिखाई देना बेहद चिंताजनक है। लोगो के अनुसार एमसीबी जिला के साथ सरगुजा संभाग मे आजकल कुछ इस प्रकार के हालात ज्यादा देखे जा रहे है

इस संदर्भ मे सवाल यह उठता है कि आखिर इन लाइटों की खरीदी में गुणवत्ता के मानकों का पालन हुआ या नहीं? क्या घटिया सामग्री की आपूर्ति हुई? क्या ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी जवाबदेही निभाई? ये ऐसे सवाल हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
कहा जा सकता है कि जनता के टैक्स का पैसा सजावट के नाम पर खंभे खड़े करने में नहीं, बल्कि वर्षों तक रोशनी देने वाली व्यवस्था बनाने में खर्च होना चाहिए। शासन की अच्छी पहल को घटिया खरीदी और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ने से बचाना होगा। अब वक्त है कि जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो और बंद पड़ी हाईमास्ट लाइटें फिर से रोशन हों।





