उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 क्या अखिलेश यादव का चुनाव न लड़ने का फैसला सपा पर भारी पड़ेगा? ‘रणछोड़’ के ताने से भाजपा को मिला नया हथियार!
उत्तरप्रदेश – उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव का चुनाव न लड़ने का ऐलान समाजवादी पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी करता दिखाई दे रहा है। कभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देने वाले अखिलेश अब खुद विधानसभा चुनाव से दूर रहने की बात कह रहे हैं। उनका तर्क है कि वह लोकसभा से सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। लेकिन सवाल है—क्या यह राजनीतिक रणनीति है या चुनावी जोखिम से बचने का रास्ता?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इसी मुद्दे पर अखिलेश को ‘रणछोड़’ बताते हुए हमला बोला। उनका तंज है—पहले चुनौती दी, अब भाग खड़े हुए! भाजपा के लिए यह बयान केवल राजनीतिक कटाक्ष नहीं, बल्कि सपा नेतृत्व की कथित कमजोरी को जनता के बीच स्थापित करने का अवसर है।

अखिलेश का यह फैसला कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर डाल सकता है। जब पार्टी का सर्वोच्च नेता खुद विधानसभा की लड़ाई से दूर रहेगा, तो भाजपा इसे नेतृत्व के आत्मविश्वास पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल करेगी। हालांकि, 2012 में भी अखिलेश विधानसभा चुनाव नहीं लड़े थे और मुख्यमंत्री बने थे;
सपा की असली चुनौती केवल अखिलेश की उम्मीदवारी नहीं, बल्कि संगठन, जातीय समीकरण और कांग्रेस के साथ गठबंधन की अनिश्चितता है। 2024 में 37 लोकसभा सीटें जीतने के बावजूद पार्टी को उस समर्थन को विधानसभा में बदलना होगा।
अखिलेश का फैसला भाजपा को आक्रामक प्रचार का मौका जरूर देता है। यदि सपा इसका ठोस जवाब नहीं दे पाई, तो ‘रणछोड़’ का राजनीतिक तंज उसके नेतृत्व और चुनावी अभियान पर भारी पड़ सकता है।





