खैर लकड़ी की तस्करी का गढ़ बनता सरगुजा संभाग! वन विभाग की निगरानी पर सवाल, मिलीभगत के आरोपों से घिरा महकमा

एमसीबी में पिकअप से खैर लकड़ी बरामद, चालक फरार; आखिर जंगलों की संपदा लुटने पर वन विभाग की जवाबदेही कौन तय करेगा?
छत्तीसगढ़ – के सरगुजा संभाग में खैर की लकड़ी की कथित बड़े पैमाने पर हेराफेरी और तस्करी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खैर की लकड़ी से बनने वाले बेशकीमती कत्थे की बाजार में मांग के बीच जंगलों से लकड़ी की अवैध निकासी का मामला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। आरोप हैं कि वन विभाग की लापरवाही और कथित मिलीभगत के चलते तस्करों के हौसले बुलंद हैं।

एमसीबी जिले में एक पिकअप वाहन में खैर की लकड़ी भरी हुई पकड़े जाने की घटना ने वन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के आरोपों को और मजबूत किया है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान चालक फरार हो गया। सवाल यह है कि जब वाहन में खैर की लकड़ी पकड़ी गई, तो चालक आखिर कैसे भाग निकला? क्या मौके पर पर्याप्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, या फिर कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई?

*खैर की लकड़ी आखिर तस्करी का प्रमुख साधन क्यों बन रही है?* क्या वन विभाग को अवैध कटाई और परिवहन की जानकारी नहीं मिलती? यदि जानकारी मिलती है, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती? जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला विभाग आखिर अपनी जवाबदेही से कब तक बचता रहेगा?

खैर की लकड़ी की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नियमित गश्त, अवैध परिवहन पर कठोर कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। केवल लकड़ी पकड़ने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच होनी चाहिए।

वन अमले की कार्यप्रणाली के चलते सवाल उठने लगे है कि *जंगलों की संपदा पर आखिर कब तक तस्करों का कब्जा और वन विभाग की खामोशी बनी रहेगी?

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