सिक्किम जैसी तबाही का डर? उत्तराखंड की 426 ग्लेशियल झीलों पर नजर

उत्तराखंड में 426 झीलों पर नजर, –
सामने आ रही जानकारियों के अनुसार
हिमालयी खतरे का एक बड़ा हिस्सा उत्तराखंड से जुड़ा है। राज्य में करीब 426 ग्लेशियल झीलें चिन्हित की गई हैं। इनमें सभी झीलें खतरनाक नहीं हैं, लेकिन बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों के पीछे हटने के साथ इनके आकार और स्थिरता पर लगातार नजर रखने की जरूरत बढ़ गई है।

सिक्किम में 2023 में दक्षिण ल्होनक झील फटने से जो तबाही हुई थी, उसने पूरे हिमालयी राज्यों के लिए चेतावनी दी थी।

जोखिम: नेपाल, भूटान, सिक्किम और एवरेस्ट दायरे में सबसे ज्यादा-

नए अध्ययन में नेपाल, भूटान, सिक्किम और एवरेस्ट क्षेत्र को सबसे ज्यादा जोखिम वाले दायरे में रखा गया है।

– भोटेकोशी और त्रिशूली बेसिन (नेपाल): जहां हाल की तबाही हुई, वहीं पर 50 से ज्यादा खतरनाक झीलें हैं।
– सिक्किम: चुंगथांग डैम तबाही के बाद 20 झीलें अति संवेदनशील घोषित।
– भूटान: फो-चू और मो-चू नदी घाटी में 25 झीलें खतरे में।

 

भारत क्या कर रहा है?
आने वाले संभावित खतरों को भापते हुए भारत ने भी आपेक्षित सावधानियां भरे कदम उठाये है जिसमे
– NDMA और CWC की निगरानी: केंद्रीय जल आयोग ने 10 खतरनाक झीलों पर ऑटोमेटिक वाटर लेवल सेंसर लगाए हैं।
– अर्ली वार्निंग सिस्टम: सिक्किम और उत्तराखंड में GLOF के लिए सायरन सिस्टम लगाने का काम शुरू।
– नया मैप: ISRO ने हिमालय की 28,000 से अधिक ग्लेशियल झीलों का नया डेटा बैंक तैयार किया है।

विशेषज्ञों का कहना है, केदारनाथ, धराली और अब नेपाल – ये तीनों घटनाएं एक ही चेतावनी हैं। हिमालय में वाटर बम टिक-टिक कर रहा है। अब वक्त है कि हम विकास के साथ-साथ हिमालय के इस बदलते स्वरूप को भी गंभीरता से समझें, नहीं तो 30 लाख की यह संख्या सिर्फ आंकड़ा नहीं, हकीकत में तबाही बन सकती है।

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