MP हो या CG जहरीली शराब के चपेट मे – MP मे 23 मरे

मध्यप्रदेश में अवैध और जहरीली शराब का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है, और उससे होने वाली मौतों का सिलसिला भी नहीं रुक रहा है। ताजा हृदयविदारक घटना सागर जिले की है, जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। वहीं पड़ोसी छत्तीसगढ़ की हालत भी इस मामले में कुछ अच्छी नहीं है, जहां कोचिया तंत्र आज भी सक्रिय है।

MP में – 23 मौतें, 120 बीमार-

खबरों के अनुसार मामला सागर जिले की बंडा तहसील के गूगरा खुर्द, नौराज, बैराज और पाटन सहित आधा दर्जन गांवों का है। यहां ग्रामीणों ने सरकारी दुकान, ढाबे और किराना दुकान से खरीदी गई शराब का सेवन किया था।

सूत्रों के अनुसार शराब पीने के बाद कुछ लोगों ने बेचैनी की शिकायत की और इसके बाद उल्टी सीने मे जलन व दर्द के बाद मौतो का सिलसिला आरम्भ हो गया । और देखते ही देखते यह आंकड़ा 23 तक पहुंच गया। वहीं इससे प्रभावित 120से अधिक लोग प्रभावित लोग अस्पतालो में भर्ती होकर जीवन मृत्यु से संघर्ष कर रहे है जिससे इस आंकड़े मे इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है

मौतो के बाद एक्शन: 5 अधिकारी निलंबित, दुकानें सील-

जैसा कि आम राजनीति मे होता है वैसे ही मध्यप्रदेश के सागर मे भी नजर आया जहरीली मौतो के बड़े आंकड़ो से हिली राज्य सरकार ने रक्षात्मक कदम उठाते हुए मामले में जांच के आदेश दिए हैं। वहीं आबकारी विभाग के अधिकारियो को निलंबित कर सख्त रुख अपनाने का संदेश भी दिया जिसमे – सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को निलंबितकिया गया वहीं संभागीय उड़नदस्ता प्रभारी एवं उपायुक्त नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैचकरने के साथ
बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गूगरा चौकी प्रभारी भी निलंबित कर दिए गए
साथ ही
आबकारी विभाग ने बरेठी, बंडा, शाहगढ़, मगरधा, विनायका, दलपतपुर और बरायठा की 7 शराब दुकानों को सील कर सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। खबरों के अनुसार प्रारंभिक जांच में मिलावट और यूपी से भी जुड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले मे 14 लोगों को हिरासत में लिया है।

छत्तीसगढ़ कनेक्शन: यहां भी वही कहानी-

मध्यप्रदेश से सटे छत्तीसगढ़ में भी अवैध महुआ शराब और नकली अंग्रेजी शराब का कारोबार जड़ों तक फैला है। बिलासपुर, रायगढ़, सरगुजा और बस्तर संभाग में जहरीली शराब से बीमार व मौते होने की खबरें आती हैं। बताया जाता है कि सरकारी दुकानों के आसपास कोचियों द्वारा सस्ती नकली शराब बेचने का धंधा खुलेआम चलता है। आबकारी विभाग की मिलीभगत और सीमा पर चेकिंग न होने से MP और CG के बीच अवैध शराब की तस्करी भी तेज है जिसमे एमसीबी जिला बताया जाता है कि सीमा पार अवैध शराब तस्करी का गढ़ बन चूका है

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक दोनों राज्यों की आबकारी और पुलिस संयुक्त अभियान नहीं चलाएगी और गांव-स्तर पर जनजागरूकता नहीं होगी, तब तक गरीब आदिवासी और मजदूर वर्ग यूं ही जहरीली शराब की भेंट चढ़ता रहेगा। वहीं सवाल सिर्फ निलंबन का नहीं, बल्कि इस पूरे माफिया नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का है। लेकिन यह काम आसान नहीं कहा जा सकता है क्योंकि दबी जुबान मे यह कहते आसानी से सुना जा सकता है कि सत्ता व सिहासन मे कोई भी बैठे लेकिन शराब मर्फीया के विरुद्ध कोई कड़ा कदम नहीं उठा सकता है क्योंकि सवाल चुनाव का होता है?

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