तीजा व्रत में दिखी नारी शक्ति, भक्ति और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की भव्य झलक

छत्तीसगढ़ में तीजा व्रत महिलाओं की आस्था, समर्पण और नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। हरतालिका तीज के अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखी ।वहीं धार्मिक मान्यताओ के अनुसार अविवाहित युवतियां भी मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत श्रद्धापूर्वक रखने की बात कहीं कहीं सुनने को मिली

विवाहित महिलाओ के लिए सबसे अहम कहे जाने वाले इस व्रत से पहले महिलाएं विशेष तैयारियां करती हैं। नए वस्त्र, आभूषण और श्रृंगार के साथ पूजा की सामग्री जुटाई जाती है। घरों में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष स्थान सजाया जाता है। महिलाएं मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजा करती हैं। बेलपत्र, फूल, फल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित कर माता पार्वती से अखंड सौभाग्य तथा परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।

छत्तीसगढ़ में तीजा केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप भी ले चुका है। विभिन्न शहरों और गांवों में तीजा मिलन समारोह, सामूहिक पूजा, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के भव्य आयोजन होते हैं। मायके पहुंची महिलाएं एक-दूसरे को तीज की बधाई देती हैं और पारंपरिक गीतों के साथ पर्व की खुशियां साझा करती हैं।

तीजा व्रत महिलाओं की अटूट भक्ति, आत्मबल और संकल्प की शक्ति को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ में इसका आयोजन लोकपरंपरा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

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