काले रीछों के बीच सफेद भालू-, एमसीबी के जंगलों का दुर्लभ रहस्य

चिरमिरी से मरवाही तक दिखे सफेद रंग के रीछ- 1974 की घटना ने भी छोड़ा था सवाल-; वैज्ञानिक कारण आनुवंशिक बदलाव
छत्तीसगढ़ – घने जंगलों, पहाड़ियों और वन्यजीवों के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में काले भालुओं के बीच सफेद रंग के भालुओं की मौजूदगी एक बार फिर चर्चा में है। चिरमिरी के रिहायशी इलाकों और मनेंद्रगढ़ के जंगल से लगे क्षेत्रों में सफेद भालू दिखाई देने की घटनाओं ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। वैसे वर्ष 2020 में चिरमिरी के डोमनहिल क्षेत्र में सफेद भालू की तस्वीर सामने आने के बाद वन विभाग ने भी उसकी निगरानी की थी।

वहीं स्थानीय लोगों के बीच सफेद भालू को लेकर पुराना इतिहास भी बताया जाता है। चिरमिरी में वर्ष 1974 में एक सफेद भालू के ट्रक की चपेट में आने की चर्चा आज भी होती है। उस समय यह सवाल उठा था कि सामान्यतः काले रंग के दिखने वाले रीछ का रंग सफेद कैसे हो सकता है। अब वर्षों बाद ऐसी घटनाओं के सामने आने से यह चर्चा फिर जीवित हो गई है।

अलग प्रजाति नहीं, रंग में आनुवंशिक बदलाव-

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ में पाया जाने वाला भालू मुख्यतः स्लॉथ बियर (Melursus ursinus) है, जिसका सामान्य रंग काला होता है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार स्लॉथ बियर का शरीर सामान्यतः काले बालों से ढका रहता है, हालांकि बालों के रंग में कुछ प्राकृतिक विविधता हो सकती है।

सफेद रंग का दिखाई देना अल्बिनिज्म (रंजकता की कमी) या उससे जुड़े आनुवंशिक परिवर्तन का परिणाम हो सकता है। वर्ष 2020 में चिरमिरी के वन अधिकारियों ने भी इस संभावना की जांच की बात कही थी कि सफेद भालू कहीं आनुवंशिक परिवर्तन के कारण अल्बिनो तो नहीं है। इसलिए केवल सफेद रंग देखकर इसे बीमारी कहना उचित नहीं होगा। जबकि इसकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि वैज्ञानिक जांच अथवा वन विभाग द्वारा डीएनए या अन्य परीक्षण से ही हो सकती है।

कहां-कहां दिखे सफेद भालू?

जानकारो के अनुसार एमसीबी से लगे उत्तर छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में सफेद रीछ के सामने आने की घटनाएं दर्ज होती रही हैं। चिरमिरी के डोमनहिल में 2020 में सफेद भालू की तस्वीर और वीडियो सामने आया था। वहीं समीपवर्ती मरवाही वन क्षेत्र में भी लगातार सफेद भालुओं की मौजूदगी की खबरें सामने आईं हैl वहीं इस अंचल मे काली मादा भालू की पीठ पर दो सफेद शावक देखे जाने की घटना विशेष रूप से उल्लेखनीय बताई जाती है

इससे यह संकेत मिलता है कि सफेद रंग वाले रीछ इस वनक्षेत्र में कभी-कभार दिखाई देने वाला दुर्लभ आनुवंशिक रूप हो सकते हैं। हालांकि इनकी वास्तविक संख्या कितनी है, इसका वैज्ञानिक सर्वेक्षण अब जरूरी कहा जा सकता है।

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