विदेशी ठिकानों से ऑनलाइन सट्टे का साम्राज्य, कानून की दरारों में छिपे ‘सट्टा किंग’
देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ कानून और कार्रवाई के बावजूद डिजिटल सट्टे का नेटवर्क लगातार जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। विदेशों में बैठे ऑपरेटर, विदेशी सर्वर, बदलते डोमेन, फर्जी पहचान और सीमा-पार भुगतान तंत्र ने इस अवैध कारोबार को ऐसा स्वरूप दे दिया है, जिसमें स्थानीय कार्रवाई के बाद नेटवर्क अपना ठिकाना और तरीका बदल सकता है।
सबसे गंभीर कड़ी म्यूल बैंक खाते और दूसरे भुगतान माध्यम हैं। इनके जरिये रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने के बाद वास्तविक संचालकों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। मैसेजिंग और सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रचार, संपर्क और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता है। ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सिर्फ एक वेबसाइट या ऐप को ब्लॉक करना स्थायी समाधान नहीं बनता।

कार्रवाई होती है, लेकिन नेटवर्क फिर खड़ा हो जाता है-
यही वह जगह है जहां कानून और कार्रवाई की प्रक्रिया की कमजोरियां सामने आती हैं। अलग-अलग राज्यों के अधिकार क्षेत्र, विदेशी कंपनियों और सर्वरों तक पहुंच, डिजिटल साक्ष्य जुटाने, धन की वास्तविक श्रृंखला पहचानने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की लंबी प्रक्रिया जांच को जटिल बना सकती है।

सवाल इसलिए सिर्फ यह नहीं कि कितनी वेबसाइट बंद हुईं, बल्कि यह है कि उनके पीछे पैसा कौन भेज रहा है, खाते कौन उपलब्ध करा रहा है, विज्ञापन कौन कर रहा है और संचालन की कमान कहां से चल रही है।
सट्टे के खिलाफ ‘पूरे नेटवर्क’ पर प्रहार जरूरी-
कहा जाता है कि ऑनलाइन सट्टे की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत निगरानी तंत्र, संदिग्ध लेनदेन की त्वरित पहचान, म्यूल खातों पर तत्काल कार्रवाई, अवैध विज्ञापनों पर जवाबदेही और डिजिटल भुगतान श्रृंखला की निगरानी को मजबूत करना जरूरी है।
इसके साथ विदेशी जांच और वित्तीय निगरानी एजेंसियों के बीच तेज सूचना-साझाकरण की व्यवस्था होनी चाहिए। सीमा-पार ऑपरेटरों के खिलाफ जांच, संपत्ति की पहचान और कानून के अनुरूप कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना होगा।
साथ ही जनता के स्तर पर भी जागरूकता जरूरी है। आसान और तेज कमाई के नाम पर किसी अनजान सट्टा ऐप, वेबसाइट या लिंक में पैसा लगाना आर्थिक नुकसान के साथ पहचान और बैंकिंग जोखिम भी पैदा कर सकता है।
जानकार कहते है कि ऑनलाइन सट्टे का मुकाबला वेबसाइट बंद करके नहीं, बल्कि उसके पूरे ‘मकड़जाल’—ऑपरेटर, पैसा, म्यूल खाते, एजेंट, विज्ञापन और डिजिटल प्रचार—को एक साथ तोड़कर ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता हैl





