नक्सलवाद कमजोर पड़ा तो नेताओं का सुरक्षा कवच भी घटा, छत्तीसगढ़ में 116 नेताओं की सुरक्षा में बड़ी कटौती
बस्तर में बीजेपी-कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को झटका, 9 नेताओं की Z+ सुरक्षा घटाकर Z की गई; छह महीने बाद फिर होगा सुरक्षा का आकलन
छत्तीसगढ़ – कभी नक्सलियों के निशाने पर रहने वाले बस्तर के नेताओं के चारों ओर तैनात सुरक्षाकर्मियों का घेरा अब सिमटने लगा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद में कमी और बदले सुरक्षा हालात का हवाला देते हुए बीजेपी और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों के 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी घटाने का फैसला किया है। इसका असर बस्तर के कई बड़े राजनीतिक चेहरों पर पड़ा है।
सरकार के फैसले के तहत कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री कवासी लखमा, महेश गागड़ा और कर्मा परिवार से जुड़े नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है। नौ नेताओं की Z+ सुरक्षा घटाकर Z की गई है। वहीं Z श्रेणी वालों को Y+ और Y+ वालों को Y श्रेणी में रखा गया है।

पहले कैसी थी सुरक्षा?
छत्तीसगढ़ मे पहले नक्सली खतरे को देखते हुए कई नेताओं के साथ भारी सुरक्षा बल तैनात रहता था। रिपोर्ट के मुताबिक Z+ श्रेणी में करीब 55, Z में 22, Y+ में 11 और Y श्रेणी में 8 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। अब नई व्यवस्था में सुरक्षा का स्तर एक श्रेणी नीचे किया जाएगा।
गृह मंत्री ने क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक 31 मार्च 2026 के बाद पिछले छह महीनों में जमीनी हालात और खुफिया सूचनाओं के आधार पर समीक्षा की गई है। सुरक्षा एक साथ खत्म नहीं की जा रही, बल्कि चरणबद्ध तरीके से घटाई जा रही है। छह महीने बाद फिर समीक्षा होगी। गंभीर खतरा पाए जाने पर सुरक्षा का आकलन अलग हो सकता है।
क्यों लिया गया फैसला?
सरकार का तर्क है कि नेताओं की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को अब कानून-व्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा में लगाया जा सकेगा। राज्य में वीआईपी सुरक्षा पर भारी खर्च और पुलिस बल की कमी भी इस फैसले के पीछे अहम वजह मानी जा रही है।
हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सवाल उठाया है कि नक्सलवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, ऐसे में सुरक्षा घटाना जल्दबाजी है। उनका कहना है कि किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी।
क्या नियमों के तहत है कटौती?
छत्तीसगढ़ मे वीआईपी सुरक्षा स्थायी अधिकार नहीं, बल्कि खतरे के आकलन पर आधारित व्यवस्था है। इसलिए सुरक्षा समीक्षा के बाद श्रेणी घटाना नियमों के दायरे में है।





