विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर चिरमिरी में जागरूकता रैली; संदेश—समय पर उपचार, अपनों का साथ और संवेदनशील समाज ही स्वस्थ जीवन की कुंजी

छत्तीसगढ़ –
मन का दर्द दिखाई नहीं देता, लेकिन सही समय पर मिला सहारा जिंदगी बदल सकता है। मानसिक परेशानी कमजोरी नहीं, बल्कि ऐसी स्वास्थ्य चुनौती है जिसका समय पर उपचार और सहयोग से प्रभावी प्रबंधन संभव है। इसी संदेश के साथ छत्तीसगढ़के एमसीबी जिला चिकित्सालय चिरमिरी में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विशाल जागरूकता रैली और गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक रोगों के प्रति फैली भ्रांतियों, अंधविश्वास और भेदभाव को दूर कर लोगों को उपचार के लिए प्रेरित करना रहा।

इस वर्ष आयोजन की थीम “Lived Experiences Heard: Real Voices, Real Change” अर्थात अनुभवों को सुनें, वास्तविक आवाजें—वास्तविक बदलाव रही हैl कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन और सिविल सर्जन डॉ. अभय सिंह तोमर के नेतृत्व में आयोजित हुआ।

दुनिया से लेकर छत्तीसगढ़ तक मानसिक स्वास्थ्य बड़ी चुनौती-

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में एक अरब से अधिक लोग मानसिक विकारों से प्रभावित हैं। भारत के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 में वयस्कों में वर्तमान मानसिक विकारों की व्यापकता लगभग 10.6 प्रतिशत आंकी गई थी। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर आधारित अध्ययन में वयस्कों में वर्तमान मानसिक विकारों की व्यापकता लगभग 11.66 प्रतिशत पाई जाने की बात सामने आई है । ये आंकड़े अलग-अलग अध्ययनों और समयावधियों पर आधारित बताये जाते हैं,

समय पर पहचान और उपचार से बेहतर हो सकता है जीवन-

इस सबंध मे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक उदासी, घबराहट, अनिद्रा या रोजमर्रा के कामों में रुचि कम होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य विभाग का प्रयास जिले के अंतिम छोर तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।

वहीं सिविल सर्जन डॉ. अभय सिंह तोमर ने कहा कि मानसिक समस्याओं से उबर चुके लोगों के अनुभव सुनना जरूरी है। परिवार का सहयोग, भेदभाव से मुक्ति और शुरुआती लक्षणों की पहचान मरीज को बेहतर जीवन की ओर ले जा सकती है।

स्वस्थ मन के लिए अपनाएं ये उपाय-

इस संबंध मे रोग विशेषज्ञ डाक्टर का कहना है कि नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, योग-व्यायाम, संतुलित भोजन और परिवार-मित्रों से खुलकर बातचीत मानसिक स्वास्थ्य को सहारा देते हैं। तनाव या उदासी लंबे समय तक बनी रहे तो विशेषज्ञ से संपर्क करें। उपचार में चिकित्सकीय परामर्श, मनोचिकित्सा और जरूरत के अनुसार दवाएं शामिल हो सकती हैं। साथ ही दवा स्वयं बंद न करें।

कहा जा सकता है कि मदद मांगना कमजोरी नहीं, साहस है। मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी में निःशुल्क राष्ट्रीय टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है। वहीं अब संदेश साफ है—मरीज को ताने नहीं, सहारा दें; उपेक्षा नहीं, उपचार दें। क्योंकि जागरूक समाज ही मानसिक रूप से स्वस्थ समाज की नींव है।

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