दिल्ली में प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत पर रोक, मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रखने के निर्देश

देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।  विशेष सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने दिल्ली में आम नागरिकों की आवाजाही सुनिश्चित करने के साथ मेट्रो, रेलवे और इंटरनेट सेवाओं को सामान्य बनाए रखने के भी निर्देश दिए हैं।

चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा मामला

दरअसल, दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठे सवालों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, लोगों को हिरासत में लिए जाने और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने के आरोप सामने आए थे। इन्हीं मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए  न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने विशेष सुनवाई की

शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जा सकता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

विशेष रूप से उन स्थानों पर, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू नहीं है, शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों के एकत्र होने पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन का अधिकार कानून और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े उचित प्रतिबंधों के अधीन है।

दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाओं को लेकर निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाओं के सामान्य संचालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अदालत ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक होने पर कानून के अनुसार प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

इसके साथ ही दिल्ली में लगाए गए बैरिकेड्स की आवश्यकता की तत्काल समीक्षा करने को कहा गया।

इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट सेवाओं को भी कानून के अनुरूप निर्बाध बनाए रखने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य लागू कानूनों के तहत प्रशासन को प्राप्त वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होते।

वकीलों और पत्रकारों के काम में बाधा नहीं डालने पर जोर

सुनवाई के दौरान अदालत ने वकीलों और पत्रकारों को अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने में अनावश्यक बाधा नहीं पहुंचाने पर भी जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास धारा 163 से संबंधित प्रतिबंधों की सूचना देने वाले बोर्ड को, यदि अब तक नहीं हटाया गया हो, तो हटाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि न्यायालय तक पहुंच प्रभावित न हो।

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