नेपाल में मौत का आंकड़ा 750 के पार, वाटर बम की आहट से दहशत में लोग

भोटेकोशी में जलस्तर बढ़ा, दूसरी बाढ़ का खतरा; 3000 से ज्यादा अब भी लापता, 320 भारतीय शामिल
नई दिल्ली — नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को चार दिन हो चुके हैं, लेकिन तबाही का मंजर और भयावह होता जा रहा है। एक तरफ बचाव दल एक-एक जान बचाने के लिए जद्दोजहद में लगे हैं, तो दूसरी तरफ फिर से ‘वाटर बम’ की आहट ने लोगों की नींद उड़ा दी है। भोटेकोशी नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर के बाद दूसरी बाढ़ की चेतावनी जारी होने से राहत कैंपों में भी दहशत फैल गई है।

मौतों का आंकड़ा 750 के करीब पहुंच गया है, जबकि 4450 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। इसके बावजूद लापता लोगों का आंकड़ा अभी भी 3000 से ऊपर बना हुआ है, जिसमें 320 भारतीय और 537 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

चितवन से गोरखा तक शव ही शव, मुर्दाघर फुल-

बाढ़ के पानी में बहकर नीचे की ओर आए शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। अस्पतालों के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ गई है और शवों को पहचानना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

रेड क्रॉस के अनुमान के मुताबिक बाढ़ से 93,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा शव चितवन, नवलपरासी ईस्ट, धादिंग और गोरखा जिलों में मिले हैं।

लापता लोगों में 28 नेपाल पुलिस, 44 नेपाल आर्मी, 13 आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान, 15 कस्टम और 4 इमिग्रेशन अधिकारी भी शामिल हैं।

भारतीयों की स्थिति – MEA के अनुसार

– कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं।
– 400 भारतीय चीन की तरफ तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में फंसे थे, जिनमें से 96 भारतीय जमीन के रास्ते नेपाल पहुंच चुके हैं।
– 21 तमिलनाडु के कैलाश मानसरोवर यात्री सुरक्षित दिल्ली लौट आए हैं।
– त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 63 भारतीय मजदूर सुरक्षित मिले हैं।

800 से अधिक लोगों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया है, जबकि 3500 लोगों को स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में अस्थायी शेल्टर दिया गया है। बाढ़ में 35 पक्के पुल, 45 झूला पुल और 40 किमी सड़क बह गई है।

फिर मंडरा रहा वाटर बम का खतरा-

नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने चेतावनी जारी की है कि उसी जगह पर एक और ग्लेशियल झील फूटने से दूसरी बाढ़ का खतरा बन गया है।

बताया जाता है कि नदी के ऊपरी हिस्से में झील का आकार बढ़ रहा है, हालांकि राहत की बात यह है कि आई बाढ़ की तुलना में नई झील में 6 गुना पानी कम है। फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं बताया जा रहा, लेकिन निगरानी जारी है।

भारत-नेपाल सीमा पर असर-

बाढ़ ने भारत और नेपाल के बीच सीमा पार व्यापार को बुरी तरह बाधित कर दिया है।

– यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर में हाई अलर्ट जारी है, गंडक नदी की निगरानी बढ़ा दी गई है।
– रसुवा-सोनौली सीमा पर वाहनों की 16 किमी लंबी कतार लगी है।
– प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक बाढ़ के बाद बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में 5 अरब डॉलर (देश की GDP का लगभग 11%) खर्च आ सकता है, जिससे आने वाले दिनों में नेपाल के हालात और खराब होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

मदद पर सियासत-

नेपाल के पीएम बालेन्द्र शाह ने भारत-चीन समेत दुनियाभर से मदद लेने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि हमारी एजेंसियां बचाव में सक्षम हैं। लेकिन हालत और खराब होने पर अब वो भारत व अन्य कुछ देशो की सहायता व मदद ले रहे है भारत सहयोगी देशों के साथ नेपाल की सेना, पुलिस और सशस्त्र बल के साथ मिल कर दिन-रात बचाव अभियान में जुटा हैं।

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