नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही, चारों तरफ मचा हाहाकार

नई दिल्ली:- नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद चारों तरफ तबाही ही तबाही नजर आ रही है। ग्लेशियर टूटने से भोटे कोशी नदी में आए सैलाब ने दर्जनों गांव, पुल और पावर प्रोजेक्ट को बहा दिया है। इस विपदा में मरने वालों की संख्या 359 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 750 से 900 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल सेना और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार तिब्बत की ओर से भोटे कोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ा। बताया जा रहा है कि तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और मलबे से नदी का प्रवाह रुका और फिर प्राकृतिक बांध टूटने से नीचे बसे रसुवा जिले के तिमुरे, स्याफ्रुबेसी इलाके में जलप्रलय आ गया। US जियोलॉजिकल सर्वे ने इससे पहले 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसी हलचल भी दर्ज की थी।

लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों की है। इनमें भारतीयों की संख्या भी अच्छी खासी है। नेपाल पर्यटन मंत्रालय के अनुसार 133 भारतीय तीर्थयात्री लापता हैं, जिनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की है। ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों से भी संपर्क टूट गया है। सड़कें टूटने और मोबाइल नेटवर्क ठप होने से राहत कार्य में भारी दिक्कत आ रही है।

बाढ़ ने रसुवा, धादिंग, नुवाकोट, चितवन सहित 7 जिलों में तबाही मचाई है। अब तक 19 पक्के पुल और 35 से अधिक सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। 42 किमी लंबी बेत्रावती-रसुवागढ़ी सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। 354 मेगावाट क्षमता के 8 हाइड्रोपावर प्लांट भी ठप हो गए हैं।

भारत ने इस संकट में मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात कर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से 10 टन राहत सामग्री और दवाएं भेजी गई हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। वहीं यूपी और बिहार के सीमावर्ती जिलों में गंडक नदी को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

नेपाल सेना के 14 हेलीकॉप्टर और आपदा राहत टीमें लगातार रेस्क्यू में जुटी हैं। मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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