बहन से उधार लेकर मिला पहला बैट, उसी ने भारत को किया परेशान: श्रीलंका का 25 वर्षीय सितारा सोनल दिनुशा
भारत के खिलाफ 2 टेस्ट में 420 रन और 3 शतक, स्वीप शॉट से जो रूट का रिकॉर्ड तोड़ा
नई दिल्ली। कभी क्रिकेट खेलने के लिए सोनल दिनुशा के पास अपना बल्ला तक नहीं था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन क्रिकेट के प्रति जुनून इतना मजबूत था कि उनकी बहन ने पैसे उधार लेकर छोटे भाई के लिए पहला बैट खरीदा। वर्षों बाद वही संघर्ष श्रीलंका के इस 25 वर्षीय क्रिकेटर की सबसे बड़ी ताकत बन गया।
भारत के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई दो टेस्ट मैचों की सीरीज में दिनुशा ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को जमकर चुनौती दी। उन्होंने चार पारियों में 420 रन बनाए, तीन शतक और एक अर्धशतक लगाया, जबकि उनका औसत 140 का रहा। उनके नाबाद 133 रनों की पारी ने कोलंबो टेस्ट में श्रीलंका को हार से बचाने में अहम भूमिका निभाई और भारत 2-0 की क्लीन स्वीप से चूक गया। भारत ने सीरीज 1-0 से अपने नाम की।


बहन ने उधार लेकर खरीदा था पहला बैट
दिनुशा के संघर्ष की कहानी उनके क्रिकेट करियर से भी पुरानी है। आर्थिक तंगी के दौर में उनके पास क्रिकेट का जरूरी सामान तक नहीं था। उनकी बहन ने पैसे उधार लेकर उनके लिए पहला क्रिकेट बैट खरीदा।

शायद उस समय परिवार ने भी नहीं सोचा होगा कि यह छोटा सा त्याग एक दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बड़े मंच पर नजर आएगा। आज दिनुशा श्रीलंकाई क्रिकेट के उभरते सितारों में शामिल हो चुके हैं।
बास्केटबॉल पसंद था, कोच ने पहचानी क्रिकेट की प्रतिभा
दिनुशा की शुरुआती दिलचस्पी बास्केटबॉल में थी। लेकिन स्कूल में क्रिकेट खेलते समय कोच सुसंथा फेलिक्स डियास की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी। उन्हें क्रिकेट टीम में शामिल किया गया और यहीं से उनके क्रिकेट करियर की दिशा बदल गई।
बाद में कोच अशान प्रियांजन के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल को लगातार निखारा। भारत के खिलाफ सीरीज से पहले भी उन्होंने अपने कोच से भारतीय स्पिनरों से निपटने की रणनीति पर चर्चा की थी।
भारतीय स्पिनरों के खिलाफ स्वीप बना सबसे बड़ा हथियार
दिनुशा को पता था कि भारत के पास रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार और सारांश जैन जैसे स्पिन विकल्प हैं। ऐसे में उन्होंने स्पिन के खिलाफ स्वीप और रिवर्स स्वीप को अपने खेल का अहम हिस्सा बनाया।
उनकी यही रणनीति भारत के खिलाफ बेहद कारगर साबित हुई। उन्होंने सीरीज में स्वीप शॉट के जरिए असाधारण प्रदर्शन किया और इस मामले में जो रूट के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
जश्न से ज्यादा अभ्यास पर भरोसा
दिनुशा की खासियत सिर्फ रन बनाना नहीं, बल्कि लगातार सीखते और अभ्यास करते रहना है। भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में शानदार प्रदर्शन के बाद भी उनका ध्यान जश्न से ज्यादा अपने खेल को बेहतर बनाने पर रहा।
कोलंबो टेस्ट की दूसरी पारी में उनका नाबाद 133 रन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने लंबी पारी खेलकर भारतीय गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसाया और श्रीलंका को मैच बचाने में मदद की।
भारत के खिलाफ यादगार सीरीज
दो टेस्ट की इस सीरीज में दिनुशा ने चार पारियों में 100, 84, 103 और नाबाद 133 रन बनाए। कुल 420 रन के साथ वह सीरीज के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजों में रहे। उन्होंने 722 गेंदों का सामना किया और भारतीय स्पिन आक्रमण के सामने असाधारण धैर्य दिखाया।
भारत ने सीरीज तो 1-0 से जीत ली, लेकिन सोनल दिनुशा ने अपनी बल्लेबाजी से यह जरूर साबित कर दिया कि श्रीलंका को टेस्ट क्रिकेट में एक नया भरोसेमंद सितारा मिल गया है।
जिस खिलाड़ी के लिए कभी पहला बैट खरीदना भी परिवार के लिए चुनौती था, उसी खिलाड़ी ने आज दुनिया की मजबूत टेस्ट टीम भारत को पूरी सीरीज में परेशान कर दिया। सोनल दिनुशा की कहानी बताती है कि प्रतिभा को अगर मेहनत और परिवार का साथ मिल जाए, तो मुश्किल हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।





