नये भवन को तरसते छत्तीसगढ़ के जर्जर भवन मे संचालित होते शासकीय कालेज
छत्तीसगढ़ – राजनेताओं की घोषणा के बाद बीते चार पांच वर्षो मे बड़ी तादात मे नवीन महाविद्यालय कई जिलों आरम्भ हो गए थे लेकिन इतने वर्षो बाद भी इन शासकीय कालेजों को अपना भवन नसीब न होने से ज्यादातर महाविद्यालय को जर्जर जोखिम भरे पुराने भवनो पर ही अपना शिक्षण कार्य करना पड़ रहा है जिसकी जर्जर हालत विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे कालेजों मे कोरिया जिला के पोंडी मे संचालित शासकीय कालेज का नाम शामिल है वहीं इसी क्रम मे एमसीबी जिला के नागपुर स्थित शासकीय महाविद्यालय का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है
पता हो शासन द्वारा संचालित ऐसे महाविद्यालय में अध्ययनरत बच्चो को हर दिन खतरे और असुरक्षा के बीच पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।क्योंकि ज्यादातर भवन की छत की हालत खराब है, दीवारों पर जगह-जगह दरारें दिखाई देती हैं और बारिश के दौरान कई हिस्सों में पानी टपकने की समस्या बनी रहती है। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की आशंका से विद्यार्थी टीचर और अभिभावक चिंतित रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि महाविद्यालय के लिए नए भवन की मांग कई बार उच्च अधिकारियों के समक्ष रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
सवाल यह है कि जब शिक्षा संस्थान भविष्य गढ़ने की जगह हैं, तो उनके विद्यार्थी जर्जर भवनों में अपना भविष्य क्यों तलाशें? शासन-प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए नवीन भवन निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। वहीं शासन की भी जोखिम कम और सम्मान ज्यादा मिल सके






