क्या ममता से भी बड़ा हो गया पैसा? 1.80 लाख में बच्चे का सौदा, कलियुग की इस कहानी ने झकझोरा इंसानियत का जमीर!

नौ-दस माह का मासूम पश्चिम बंगाल से सकुशल बरामद, जशपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने बचाई एक नन्ही जिंदगी
छत्तीसगढ़ – कहते हैं कि मां की ममता ईश्वर का सबसे अनमोल वरदान है। मां की गोद बच्चे के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित आशियाना होती है, जहां उसे न दौलत की जरूरत होती है और न किसी ऐशो-आराम की। उसे चाहिए तो बस मां का आंचल, उसकी ममता और उसका प्यार। लेकिन जब एक मासूम की जिंदगी की कीमत 1 लाख 80 हजार रूपये लगा दी जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है—क्या कलियुग में धन का मोह मां की ममता पर भी भारी पड़ने लगा है?

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी क्षेत्र से सामने आया यह मामला इंसानियत को झकझोर देने वाला है। पुलिस के अनुसार, यशोदा यादव ने दिसंबर 2025 में एक बच्चे को जन्म दिया था। आरोप है कि मार्च 2026 में सुकरू आलम उर्फ बंगाली के माध्यम से पश्चिम बंगाल निवासी शेख अलविन को बच्चे को 1 लाख 80 हजार में बेच दिया गया। आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी, परिस्थिति या धन की लालसा रही होगी, जिसने एक मां को अपने कलेजे के टुकड़े से दूर कर दिया? इसका जवाब जांच और संबंधित तथ्यों से ही सामने आएगा। गरीबी और मजबूरी अपनी जगह हैं, लेकिन किसी मासूम का भविष्य सौदे की वस्तु बन जाए, तो समाज को आत्ममंथन करना ही होगा।

इस संवेदनशील मामले में जशपुर डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है। उनके निर्देश पर गठित विशेष पुलिस टीम पश्चिम बंगाल पहुंची और लगभग नौ से दस माह के बच्चे को सकुशल बरामद किया। मामले में मां सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

यह कार्रवाई केवल एक बच्चे की बरामदगी नहीं, बल्कि उस नन्ही जिंदगी के अधिकारों की रक्षा की उम्मीद भी है। धर्म हमें दया, करुणा और परोपकार का संदेश देता है। ऐसे में सवाल हर संवेदनशील मन से है—जिस ममता को भगवान का रूप माना जाता है, क्या उसका मूल्य पैसों में लगाया जा सकता है? वास्तव मे मासूमों की सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। पर इस घटना यह बताने के लिए काफी है कि समाज अब अपनी जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ने लग गया है?

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