साढ़े चार करोड़ की खरीदी में गड़बड़ी पर प्रभारी DEO हटे, सरगुजा संभाग में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बलरामपुर कलेक्टर की कार्रवाई के बाद दूसरे जिलों में भी जांच की मांग तेज, ‘मलाईदार पदों’ पर नियुक्ति और खरीदी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ –
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा मामला सामने आने के बाद सरगुजा संभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ अधिकारी को साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक की खरीदी में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद पद से हटाकर मूल पद पर भेजे जाने की कार्रवाई की गई है। बताया जाता है कि शिकायत मिलने के बाद बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने मामले की जांच कराई थी। जांच में खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।

इस कार्रवाई के बाद अब सरगुजा संभाग के अन्य जिलों में भी शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ अधिकारियों की नियुक्ति, खरीदी, निर्माण कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ महत्वपूर्ण पदों पर योग्यता और वरिष्ठता के बजाय प्रभाव तथा अन्य माध्यमों की भूमिका रहती है। इसी तरह पदस्थापना और स्थानांतरण को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

सबसे गंभीर आरोप ‘मलाईदार पदों’ पर कथित सेवा सत्कार और संरक्षण के हैं। यदि इन आरोपों में तथ्य हैं तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

बलरामपुर में हुई कार्रवाई ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि क्या अब सरगुजा संभाग के अन्य जिलों में भी शिक्षा विभाग की खरीदी, निर्माण, नियुक्ति, पदस्थापना और दंडात्मक कार्रवाई से जुड़े निर्णयों का व्यापक परीक्षण किया जाएगा? फिलहाल निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन इस मामले की जांच का दायरा अन्य जिलों तक बढ़ाता है या नहीं?

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