भारत-रूस टेक्नोलॉजी सहयोग पर भी नजर

भारत और रूस के बीच विज्ञान और तकनीक से जुड़ा सहयोग भी चर्चा में है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23-24 अगस्त को रूस की यात्रा पर हैं और भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में व्यापार, विज्ञान, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा प्रस्तावित है।
इस तरह की बातचीत में टेक्नोलॉजी सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे विषय भारत की दीर्घकालीन तकनीकी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
आने वाला दौर AI और स्पेस टेक का
आज की टेक खबरों से एक बात स्पष्ट दिखाई देती है कि टेक्नोलॉजी की अगली बड़ी दौड़ केवल स्मार्टफोन या कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहने वाली। AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर आने वाले वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकते हैं।
भारत के लिए यह अवसर भी है और चुनौती भी। अवसर इसलिए क्योंकि देश के पास बड़ा डिजिटल बाजार, युवा इंजीनियरिंग प्रतिभा और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम है। चुनौती इसलिए क्योंकि अत्याधुनिक चिप्स, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और साइबर सुरक्षा में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।

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