FCRA संशोधन विधेयक पर JPC की पहली बैठक, शीतकालीन सत्र में आएगी रिपोर्ट

संसद में Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA संशोधन विधेयक को लेकर आज महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। इस विधेयक की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की  पहली बैठक हुई। बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रस्तावित संशोधनों और विधेयक के प्रावधानों की जानकारी दी।

31 सदस्यीय JPC की अध्यक्षता बीजेपी सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य हैं। समिति को विधेयक की विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में पेश करनी है।

क्या है FCRA संशोधन विधेयक?

FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेशी चंदे या विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है। प्रस्तावित 2026 संशोधन में विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों के पंजीकरण, नवीनीकरण, विदेशी धन के इस्तेमाल और नियमों के उल्लंघन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव प्रस्तावित हैं।

विधेयक में एक ‘Designated Authority’ बनाने का प्रस्ताव भी है। इसके तहत किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद्द, समाप्त या सरेंडर होने की स्थिति में विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

विपक्ष और सरकार के अलग-अलग तर्क

विधेयक को लेकर विपक्षी दलों और कुछ नागरिक एवं धार्मिक संगठनों ने आपत्तियां जताई हैं। उनका तर्क है कि प्रस्तावित प्रावधान सरकार को विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों पर ज्यादा नियंत्रण दे सकते हैं। वहीं सरकार का कहना है कि संशोधनों का उद्देश्य विदेशी योगदान में पारदर्शिता, जवाबदेही और उचित इस्तेमाल सुनिश्चित करना है तथा विदेशी फंड के दुरुपयोग को रोकना है।

 

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