हार का हिसाब नहीं, ईवीएम का हिसाब! राहुल के आरोपों पर साय का पलटवार, भूपेश पर भी तंज
साय बोले—जनादेश पर सवाल उठाने से भरोसा वापस नहीं आएगा, पहले आत्ममंथन करे कांग्रेस
छत्तीसगढ़ – चुनावी राजनीति में जीत का स्वाद मीठा और हार का स्वाद कड़वा होता है, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुताबिक कांग्रेस ने हार की कड़वाहट दूर करने का अपना अलग नुस्खा खोज लिया है—कभी ईवीएम, कभी एसआईआर और अब चुनाव आयोग!
राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों पर मुख्यमंत्री साय ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने के बाद अपनी नीतियों, नेतृत्व और कार्यशैली पर आत्ममंथन करने के बजाय हार का नया बहाना तलाशती है। उनका तंज साफ था—चुनाव जीतें तो व्यवस्था ठीक, हारें तो व्यवस्था पर ही सवाल!

जनादेश पसंद नहीं आया तो सवालों की नई फाइल!
साय ने कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत स्वाभाविक है। जनता जिसे जनादेश देती है, उसे सरकार चलाने का अवसर मिलता है और जिसे जनादेश नहीं मिलता, उसे जनता के बीच जाकर भरोसा दोबारा हासिल करना चाहिए। चुनाव परिणामों पर लगातार संदेह जताने से जनता का विश्वास वापस नहीं आएगा।

छत्तीसगढ़ से शुरू हुई यह जुबानी जंग अब राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच गई है। एक ओर राहुल गांधी चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा इसे कांग्रेस की चुनावी हार के बाद की राजनीति बता रही है। ऐसे में लोकतंत्र के मैदान में असली मुकाबला सिर्फ वोटों का नहीं, वोटों के बाद उनकी व्याख्या का भी दिखाई दे रहा है।
भूपेश को साय की सलाह—पहले अपनी पारी संभालिए!
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की स्मृति ईरानी पर टिप्पणी के सवाल पर साय ने भी तंज कसने में देर नहीं की। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल पहले अपनी चिंता करें और भाजपा की चिंता छोड़ दें। साय ने यह भी कहा कि बघेल को पंजाब की जिम्मेदारी से “किक आउट” किया गया है।
यानी छत्तीसगढ़ की सियासत में संदेश साफ है—कांग्रेस चुनावी नतीजों का हिसाब मांग रही है, भाजपा कांग्रेस से आत्ममंथन का हिसाब मांग रही है और दोनों दल एक-दूसरे को आईना दिखाने में व्यस्त हैं। अब जनता किस आईने में अपना चेहरा देखती है, यही लोकतंत्र का अगला अध्याय तय करेगा।





