धान खरीदी की तारीख पर छत्तीसगढ़ में सियासी संग्राम! बघेल के वार पर मंत्री श्याम बिहारी का पलटवार,

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तारीख को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज होने लगा है। धान के कटोरे के नाम से मशहूर प्रदेश में धान केवल फसल नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका और राजनीति का बड़ा मुद्दा है। एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग को लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि खरीदी उचित समय पर शुरू हो जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए किसानों के हितों का सवाल उठाया है। इसके जवाब में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पलटवार करते हुए सरकार का पक्ष रखा। दोनों दलों के बीच बयानबाजी के साथ धान खरीदी की तारीख अब प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गई है।

किसानों के लिए तारीख क्यों अहम?

धान खरीदी में समय पर शुरुआत किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फसल कटाई के बाद उपज का सुरक्षित भंडारण, परिवहन का खर्च और अगली फसल की तैयारी जैसी चुनौतियां किसानों के सामने रहती हैं। ऐसे में खरीदी की स्पष्ट तारीख और सुचारु व्यवस्था उन्हें आर्थिक योजना बनाने में मदद करती है।

कांग्रेस एक नवम्बर से धान खरीदी शुरू करने की मांग कर रही है, जबकि भाजपा समय पर व्यवस्था शुरू होने का भरोसा दे रही है। इस राजनीतिक टकराव के बीच किसानों की अपेक्षा है कि खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त इंतजाम हों, टोकन प्रक्रिया आसान रहे और भुगतान में देरी न हो।

वादे नहीं, व्यवस्था का इंतजार!

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए भले ही आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया हो, लेकिन किसानों के लिए यह उनकी मेहनत की कमाई का सवाल है। अब सबकी निगाहें सरकार की आधिकारिक तारीख और तैयारियों पर टिकी हैं।

सवाल सीधा है—धान पर सियासत कब थमेगी और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्पष्ट व्यवस्था कब मिलेगी? इसका जवाब राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि समय पर खरीदी और प्रभावी व्यवस्था से मिलेगा।

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