पंजाब में बिजली संकट- ड्रग्स के बाद ‘पावर कट’ बना मान सरकार के लिए नया सियासी करंट
पंजाब में आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार के सामने बिजली संकट ने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। राज्य में बिजली की मांग 16,000 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है और हाल के दिनों में औद्योगिक इकाइयों को 12 से 14 घंटे तक के कट झेलने पड़े हैं। लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और मोहाली जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को भी कई घंटे की अनियोजित कटौती का सामना करना पड़ा है।
सवाल यह है कि पंजाब में अचानक अंधेरा क्यों छाया? रिपोर्टों के मुताबिक बढ़ती मांग के मुकाबले राज्य की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता कमजोर हुई है। कई थर्मल यूनिट तकनीकी कारणों से बंद रहे, जबकि कोयले की कमी ने संकट को और गहरा दिया। पंजाब में बिजली उत्पादन करीब 1,500 मेगावाट तक घटने की बात खुद राज्य के बिजली मंत्री ने कही है।

हालांकि पूरे संकट का ठीकरा केवल मान सरकार पर फोड़ना भी पूरी तस्वीर नहीं कहा जायेगा है। देशव्यापी कोयला संकट, गर्मी और बढ़ी मांग तथा परिवहन संबंधी बाधाएं भी इसके पीछे हैं। फिर भी विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने मांग बढ़ने के बावजूद पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था और अग्रिम योजना नहीं बनाई को नकरा नहीं जा सकता
राजनीतिक तौर पर यही सबसे बड़ा खतरा है। जिससे पंजाब में ड्रग्स और कानून-व्यवस्था के बाद बिजली कटौती ऐसा मुद्दा बन सकती है जो सीधे आम आदमी, किसान और उद्योग—तीनों को प्रभावित करे। किसान सिंचाई के लिए बिजली चाहते हैं और उद्योग उत्पादन के लिए।वहीं पंजाब मे उद्योग जगत पहले ही उत्पादन और कारोबार के नुकसान की शिकायत कर रहा है।

राजनैतिक आंकड़ों बाज के अनुसार चुनाव से पहले जनता का सवाल सीधा होगा—‘वादों की रोशनी कहां है?’ यदि सरकार जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं कर पाती, तो बिजली संकट महज प्रशासनिक समस्या न रहकर AAP और भगवंत मान के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है





