सरगुजा के सीमावर्ती इलाकों में भूमि परिवर्तन,बदलती आबादी पर गंभीर सवाल! प्रशासन मौन क्यों? जनजाति गौरव समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी
झारखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्रों में भूमि कब्जे, कथित सुनियोजित धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय बदलाव के आरोप; समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क से न्यायालय तक लड़ेगा समाज
छत्तीसगढ़ –
छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सीमावर्ती क्षेत्रों में कथित रूप से तेजी से बदल रही जनसांख्यिकी और भूमि संबंधी गतिविधियों को लेकर विवाद गहराने लगा है। झारखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों में बाहरी लोगों द्वारा सुनियोजित तरीके से बसावट बढ़ाने, जमीनों पर कब्जा करने तथा स्थानीय महिलाओं को प्रभावित कर धर्मांतरण के लिए दबाव डालने के आरोप सामने आए हैं। इन गंभीर शिकायतों को लेकर जनजाति गौरव समाज ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
जनजाति गौरव समाज के पदाधिकारी संतोष सिंह ने आरोप लगाया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व और आबादी के स्वरूप में हो रहे कथित बदलाव को प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इन गतिविधियों की निष्पक्ष जांच और समय रहते कानूनी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में गंभीर सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

शिकायतों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल?
संतोष सिंह ने मांग की कि झारखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाया जाए। संदिग्ध भूमि हस्तांतरण, अवैध निर्माण और अतिक्रमण की राजस्व अभिलेखों के आधार पर विशेष जांच कराई जाए। यदि किसी निर्माण या कब्जे की अवैधता प्रमाणित होती है तो ध्वस्तीकरण सहित कठोर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कथित जबरन धर्मांतरण और महिलाओं को प्रलोभन अथवा दबाव में लेने की शिकायतों पर भी स्वतंत्र जांच की मांग की।
कार्रवाई नहीं तो आंदोलन से न्यायालय तक संघर्ष-
जनजाति गौरव समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शिकायतों को लगातार अनसुना किया गया तो संगठन आंदोलन शुरू करेगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा।
अब सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सीमावर्ती क्षेत्रों से उठ रही इन शिकायतों पर प्रशासन कब गंभीरता दिखाएगा? क्या शासन संभावित सामाजिक तनाव को रोकने के लिए समय रहते जांच और पारदर्शी कार्रवाई करेगा, या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी?
कहा जा रहा है कि सरगुजा की सामाजिक शांति, जनजातीय अधिकारों और कानून के शासन की रक्षा के लिए अब प्रशासन की निष्पक्ष कार्रवाई सबसे बड़ी कसौटी बन गई है।






