चक्रवात का खतरा पहले से, लेकिन शिक्षा विभाग की छुट्टी का फैसला आखिरी पहर में! आखिर बच्चों और शिक्षकों को कब मिलेगी राहत?
मौसम बिगड़ने की चेतावनी समय पर, लेकिन छुट्टी का ऐलान करने में शिक्षा विभाग की घड़ी क्यों हो जाती है बंद?
छत्तीसगढ़ – अर्नव चक्रवात के असर से छत्तीसगढ़ में मौसम ने करवट ली तो शासन-प्रशासन ने एहतियातन तैयारियां शुरू कर दीं, लेकिन शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली ने एक अलग ही तूफान खड़ा कर दिया। सबसे ज्यादा परेशानी उन शिक्षकों और विद्यार्थियों को उठानी पड़ी, जिन्हें यह पता ही नहीं था कि अगले दिन स्कूल जाना है या घर पर रहना है।
पहले दिन छुट्टी का आदेश समय पर जारी हुआ, लेकिन दूसरे दिन मौसम के बिगड़ते हालात के बावजूद छुट्टी के फैसले के लिए देर रात तक इंतजार करना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि कई शिक्षक सुबह की तैयारी कर स्कूल के लिए निकल पड़े और बच्चों के अभिभावक भी असमंजस में रहे। जिन्हें छुट्टी की खबर समय पर नहीं मिली, उनकी परेशानी का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।


सवाल यह है कि जब चक्रवात और खराब मौसम का पूर्वानुमान पहले से उपलब्ध था, तो शिक्षा विभाग को निर्णय लेने में इतनी देर क्यों लगी? क्या बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा फैसला भी अंतिम समय की औपचारिकता बनकर रह गया है?
विडंबना देखिए, मौसम विभाग आसमान में आने वाले तूफान की चेतावनी पहले दे देता है, लेकिन शिक्षा विभाग छुट्टी के आदेश का तूफान कब आएगा, इसकी सूचना तक समय पर नहीं दे पाता!
आखिर छुट्टी का फैसला रात के अंधेरे में ही क्यों होता है? क्या विभाग के पास कोई पूर्व निर्धारित व्यवस्था नहीं है?
शिक्षा विभाग को समझना होगा कि छुट्टी का आदेश केवल कागजी सूचना नहीं, हजारों शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुरक्षा से जुड़ा निर्णय है। मौसम का मिजाज बदलने से पहले नहीं तो कम से कम स्कूल खुलने से पहले तो विभाग का मिजाज बदलना चाहिए।





