महानदी मैया की महाआरती में गूंजे वैदिक मंत्र, दीपों की दिव्य आभा से आलोकित हुई माता शबरी की पावन नगरी शिवरीनारायण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सपत्नीक की चित्रोत्पला गंगा महाआरती, प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना के साथ जल संरक्षण का दिलाया संकल्प
छत्तीसगढ़ – भगवान श्रीराम की भक्ति और माता शबरी की अटूट श्रद्धा से पावन शिवरीनारायण की धरती पर महानदी मैया की महिमा का अनुपम दृश्य साकार हुआ। महानदी के पवित्र तट पर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और दीपों की दिव्य आभा के बीच आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय के साथ श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। इस पावन अवसर पर उन्होंने महानदी मैया की आराधना कर छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और समस्त प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महानदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति, सभ्यता और जनजीवन की जीवनरेखा है। जिस प्रकार मां गंगा भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं, उसी प्रकार महानदी छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी और श्रद्धा का प्रतीक है। नदियों की पूजा तभी सार्थक होगी, जब उनके संरक्षण, स्वच्छता और संवर्धन का संकल्प भी लिया जाए।

जल संरक्षण ही भविष्य की सच्ची आराधना-

मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि ‘जल है तो कल है’ के मंत्र को जन-जन का संकल्प बनाया जाए। वर्षा जल की एक-एक बूंद सहेजने, तालाबों-कुओं को पुनर्जीवित करने और नदियों को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए जनभागीदारी को जनआंदोलन बनाना होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित जल संचय-जनभागीदारी अभियान इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने भी महानदी के संरक्षण तथा शिवरीनारायण की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करने पर जोर दिया। श्रद्धालुओं की व्यापक सहभागिता के बीच संपन्न महाआरती ने भक्ति, प्रकृति-संरक्षण और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी दिया।

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