जब प्रशासन पहुंचता है पहाड़ों के पार, आधी समस्याएं हो जाती हैं आसान! वनांचल में कलेक्टर की चौपाल से जगी उम्मीद, समस्याओं के समाधान की शुरू हुई राह
तेंदू के पेड़ की छांव में सजा जनसंवाद, रामगढ़ से गोयनी तक पहुंचा प्रशासन; ग्रामीणों के बीच बैठकर कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने सुनीं समस्याएं
छत्तीसगढ़ मे कोरिया पहाड़ों की दुर्गम पगडंडियां, घने जंगलों के बीच बसे गांव और बुनियादी सुविधाओं की आस लगाए बैठे ग्रामीण। ऐसे में जब शासन-प्रशासन खुद उनके दरवाजे तक पहुंच जाए, तो समस्याओं के समाधान की उम्मीद ही नहीं जागती, बल्कि ग्रामीणों के चेहरों पर भरोसे की मुस्कान भी लौट आती है। सच ही है, जब प्रशासन वनांचल के अंतिम छोर तक पहुंचता है, तो समस्याओं के समाधान की राह आधी आसान हो जाती है। इसी विश्वास को जमीन पर उतारती नजर आईं कोरिया जिले की कलेक्टर रोक्तिमा यादव, जिन्होंने सोनहत विकासखंड के दूरस्थ पहाड़ो की गोद मे बसे गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।
रामगढ़, धनपुर, नटवाही, आनंदपुर और गोयनी के दौरे पर कलेक्टर केवल योजनाओं की समीक्षा करने नहीं पहुंचीं, बल्कि ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों को समझने के लिए उनके बीच बैठीं। कहीं तेंदू के पेड़ की छांव में चौपाल सजी, तो कहीं रास्ते में वाहन रुकवाकर ग्रामीणों से राशन, पानी, बिजली और बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली गई। उनके साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे, ताकि समस्याओं को सुनने के साथ समाधान की दिशा में तत्काल पहल हो सके।


नटवाही में सड़क-पुलिया की उम्मीद, धनपुर में पेयजल पर त्वरित पहल-
नटवाही-गोपद मार्ग पर सड़क और पुलिया निर्माण की मांग पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। धनपुर में पाइपलाइन लीकेज से लगभग 19 घरों तक पानी नहीं पहुंचने की शिकायत पर तत्काल मरम्मत कराने को कहा। गोयनी में सड़क, पुल-पुलिया और बिजली की जरूरतों पर चर्चा कर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि योजनाओं की वास्तविक सफलता का पता ग्रामीणों के बीच पहुंचकर ही चलता है।
यह पहल बताती है कि संवेदनशील प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत उसकी पहुंच है। जब अधिकारी दुर्गम गांवों तक पहुंचते हैं, तो ग्रामीणों की झिझक टूटती है, भरोसा मजबूत होता है और समाधान की शुरुआत होती है। कोरिया में यह जनसंवाद सुशासन की उस तस्वीर को सामने लाता है, जहां शासन केवल कार्यालयों में नहीं, बल्कि गांव की चौपाल और आमजन के द्वार पर भी दिखाई देता है।





