शासन के आदेश बेअसर- सरगुजा में शिक्षकों से अब भी गैर-शैक्षणिक काम

निर्देश के बाद भी नहीं थमा संलग्नीकरण का खेल- बलरामपुर में हालात सबसे खराब –
छत्तीसगढ़ – शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरगुजा संभाग में शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य लिए जाने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बताया जाता है कि लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने 17 जुलाई 2026 को पत्र जारी कर शिक्षकों को गैर-शिक्षकीय कार्यों से हटाकर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर कार्य कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। संभागीय स्तर से संबंधित जिलों को निर्देश जारी होने के बावजूद यदि शिक्षक अब भी गैर-शिक्षकीय दायित्वों में लगाए जा रहे हैं, तो यह महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि शासन के आदेशों की खुलेआम अनदेखी का गंभीर मामला है।

इस संदर्भ मे सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन स्तर से आदेश जारी हो चुका है और उसके पालन के लिए संभागीय अधिकारियों द्वारा जिलों को निर्देश भी दिए जा चुके हैं, तो आखिर जमीनी स्तर पर आदेश लागू क्यों नहीं हो रहा? क्या अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर है कि शासन के पत्र महज फाइलों की शोभा बनकर रह गए हैं?

जानकर बतलाते है कि शिक्षकों को उनके मूल शैक्षणिक दायित्व से हटाकर अन्य कार्यों में लगाए जाने का सीधा असर सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था पर पड़ता है। वहीं, आदेश जारी होने के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं होना उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

बताया जा रहा है कि बलरामपुर जिले में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं, जहां शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि शासन के आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

कहा जा सकता है कि यदि आदेशों की अवहेलना पर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होगी, बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि शासन के निर्देशों की जमीनी स्तर पर कोई अहमियत नहीं है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में केवल कागजी कार्रवाई करते हैं या वास्तव में शासन के आदेशों का पालन सुनिश्चित कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी करते हैं।

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