चुनाव आयोग ने दी सफाई – नोटिस से नाम नहीं कटेगा
नई दिल्ली- दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किए जाने के बाद चुनाव आयोग ने स्थिति साफ कर दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलना मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का संकेत नहीं है। किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई और सक्षम निर्वाचन अधिकारी के उचित आदेश के नहीं हटाया जाएगा।
चुनाव आयोग के मुताबिक मतदाता सूची में सामने आई विसंगतियों, दस्तावेजों के मिलान और मैपिंग से जुड़ी स्थिति के कारण संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं। दिल्ली में ऐसे करीब 33 लाख 13 हजार मतदाताओं को नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया बताई गई है। नोटिस पाने वाले मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना पक्ष रख सकते हैं।

दिग्गजों को नोटिस मिलने की खबर सामने आने के बाद आम मतदाताओं के बीच भी हड़बड़ाहट और भ्रम की स्थिति पैदा हुई। कई लोगों को आशंका होने लगी कि नोटिस का मतलब सीधे मतदाता सूची से नाम काटना है। चुनाव आयोग की सफाई के बाद इस आशंका को दूर करने की कोशिश की गई है।
आयोग ने साफ किया है कि नोटिस प्रक्रिया का एक हिस्सा है, अंतिम फैसला नहीं। संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और दस्तावेजों तथा उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी अंतिम निर्णय करेंगे।

इस विषय के जानकार कहते है कि फिलहाल नोटिस को लेकर घबराने के बजाय मतदाताओं को अपने दस्तावेज तैयार रखने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब देने की जरूरत है। अंतिम निर्णय सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही होगा।





