रिचार्ज कंपनियों पर TRAI की लगाम- अब डेटा न चाहने वालों से जबरन वसूली पर चोट

नई दिल्ली – मोबाइल रिचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को लेकर अब नियामक का शिकंजा कस गया है। TRAI ने संशोधन के जरिए ऐसी व्यवस्था की है, जिसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को Voice और SMS के लिए अलग Special Tariff Voucher (STV) उपलब्ध कराना होगा। इसमें डेटा लेना अनिवार्य नहीं होगा। यह नियम 22 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।

ट्राई का नियम सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस ग्राहक को इंटरनेट चलाना ही नहीं है, वह हर महीने डेटा के पैसे क्यों दे? बुजुर्ग, फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले, कम डेटा उपयोग करने वाले और केवल कॉलिंग की जरूरत रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव सीधी राहत बन सकता है। TRAI के अनुसार Voice-SMS-only पैक में डेटा शामिल नहीं होगा और ऐसे पैक अलग-अलग वैधता अवधि के लिए उपलब्ध होंगे।

जानकार बतलाते है कि अब तक बाजार में कंपनियों द्वारा अलग-अलग कॉम्बिनेशन वाले प्लान पेश किए जाते रहे हैं। TRAI खुद स्पष्ट करता है कि वह मोबाइल टैरिफ की कीमत तय नहीं करता, लेकिन कंपनियों को पारदर्शिता, गैर-भेदभाव और उपभोक्ता हितों के नियामकीय सिद्धांतों का पालन करना होता है।

यहीं से उपभोक्ता अधिकार का असली सवाल उठता है—सेवा वही, जरूरत वही, फिर अनावश्यक डेटा का पैसा क्यों? प्रतिस्पर्धा के नाम पर यदि ग्राहक को उसकी जरूरत से ज्यादा सेवा खरीदने के लिए मजबूर किया जाए तो यह उपभोक्ता की पसंद को कमजोर करता है। अब कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनका कारोबार ग्राहक की जरूरत के मुताबिक है, न कि ग्राहक को कंपनी के बनाए पैकेज के मुताबिक ढालने का खेल।

इसी बीच केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन के ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए भी गुणवत्ता मानक लागू करने की दिशा में कदम उठाया है। BIS की सूची में IS 19348:2025 के तहत Smartphone Screen Protectors को शामिल किया गया है। इससे घटिया और भ्रामक गुणवत्ता वाले स्क्रीन गार्ड पर नियंत्रण तथा उपभोक्ताओं को मानकीकृत उत्पाद मिलने की उम्मीद है।

साफ संदेश है—उपभोक्ता सिर्फ भुगतान करने वाली मशीन नहीं है। उसे अपनी जरूरत की सेवा, सही कीमत और भरोसेमंद गुणवत्ता चुनने का अधिकार है। अब असली परीक्षा नियम बनाने की नहीं, बल्कि टेलीकॉम कंपनियों पर इन नियमों का सख्ती से पालन कराने की होगी।

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