छत्तीसगढ़ मे 25 साल बाद भी नहीं बना पुल- बहती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल-, जिम्मेदारों के आश्वासन पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ – आजादी के दशकों बाद देश ने विकास के अनेक आयाम छुए, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने के बाद भी प्रदेश के कई ग्रामीण अंचल बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसका ज्वलंत उदाहरण एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत नारायणपुर के धुईपानी में देखने को मिल रहा है, जहां पुलिया के अभाव में छोटे-छोटे बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है।
तेज बहाव के बीच बच्चों की जिंदगी दांव पर-

धुईपानी के ग्रामीणों के अनुसार स्कूल जाने के लिए बच्चों को बहती नदी-नाले को पार करना पड़ता है। बरसात के दिनों में नदी का बहाव तेज हो जाने पर स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। ऐसे समय में परिजन स्वयं बच्चों को नदी पार कराने के लिए उनके साथ जाते हैं। सवाल यह है कि शिक्षा हासिल करने के लिए आखिर कब तक इन मासूमों को अपनी जिंदगी दांव पर लगानी पड़ेगी?
आश्वासन बहुत मिले, जमीन पर काम नहीं- ग्रामीणों और विद्यार्थियों का कहना है कि पुल-पुलिया निर्माण को लेकर समय-समय पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन लंबे समय बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन कागजों और बैठकों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी हकीकत जस की तस है।

सरकार से ग्रामीणों का सीधा सवाल-

यह मामला केवल एमसीबी जिला के नारायणपुर के धुईपानी तक सीमित नहीं माना जा सकता। छत्तीसगढ़ के अनेक दूरस्थ गांवों में आज भी बरसाती नदी-नाले आवागमन में बड़ी बाधा बने हुए हैं। लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और जिला प्रशासन को ऐसे गांवों का सर्वे कर प्राथमिकता के आधार पर पुल-पुलियों के निर्माण करना चाहिए था लेकिन इससे संबंधित अधिकारी बड़ी कमाई के चक्कर मे जनहित से जुड़े छोटे निर्माण व विकाश को भूल गए l
कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ निर्माण के 25 वर्ष बाद भी यदि बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ रही है, तो यह विकास की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों की मांग है कि अब आश्वासन नहीं, धरातल पर पुल चाहिए—ताकि शिक्षा के रास्ते में नदी नहीं, सुरक्षित सड़क हो।





