यूपी चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में रार! रायबरेली से अखिलेश का रथ पर कांग्रेस का पलटवार अब 50-50 पर अड़ेगी कांग्रेस पार्टी? या लड़ेगी अकेले चुनाव
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन में सीटों को लेकर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। कांग्रेस जहां सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है, वहीं समाजवादी पार्टी का जोर सीटों की संख्या के बजाय ‘विनबिलिटी’ यानी जीतने की क्षमता पर जोर दे रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस कम से कम से 120 सीटों से ऊपर हिस्सेदारी की मांग कर रही है।
लेकिन इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से PDA रथ यात्रा शुरू कर नया सियासी संदेश दिया है। सपा का कहना है कि यात्रा का उद्देश्य पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करना है। अखिलेश यादव ने गठबंधन कायम रहने की बात दोहराते हुए कहा कि सीट वही मिले, जहां जीत की क्षमता हो।

लेकिन रायबरेली से रथ निकलते ही कांग्रेस की तल्खी भी सामने आ गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर सपा कांग्रेस के इलाके में अपनी ताकत दिखा सकती है तो कांग्रेस भी सैफई और कन्नौज तक जा सकती है।
जिससे सियासी सवाल अब यह है कि क्या कांग्रेस 50-50 के आसपास सम्मानजनक सीट बंटवारे की मांग पर अड़ेगी? वैसे भी पार्टी के भीतर सपा के साथ गठबंधन को लेकर अलग-अलग राय पहले से सामने आती रही है। जिसमे उत्तरप्रदेश मे अकेले चुनाव लड़ने की मांग प्रमुख होती जा रही है

राजनीति के जानकार कहते है कि कांग्रेस के लिए यह टकराव इसलिए भी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में उसकी आखिरी सरकार 1989 में रही थी; इसके बाद प्रदेश की सत्ता में उसकी वापसी नहीं हुई।
ऐसे में यदि सीट बंटवारे में कांग्रेस को अपेक्षित सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं मिलती, तो अकेले चुनाव लड़ने या किसी अन्य दल के साथ नया गठजोड़ तलाशने की संभावना राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकती है। हालांकि, फिलहाल दोनों दल गठबंधन बनाए रखने की बात कर रहे हैं। असली तस्वीर शीर्ष नेतृत्व की सीट-बंटवारे की बातचीत के बाद ही साफ होगी। लेकिन यदि सपा व कांग्रेस का गठबंधन पूर्वत भांति जारी रहा तो यह भी माना जा रहा है कि इस बार कांग्रेस को पहले से ज्यादा सीटे मिलना निश्चित है





