रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर-, पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG तक बढ़ी मुश्किलें
27 minutes ago Shrikant Shukla
नई दिल्ली – रूस-यूक्रेन युद्ध और 2026 में जारी ईरान संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल के साथ खासकर डीजल और अन्य रिफाइंड ईंधनों की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। रूस की रिफाइनरियों पर हमले, पश्चिम एशिया में ऊर्जा ढांचे को नुकसान और समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान ने वैश्विक ईंधन बाजार की चिंता बढ़ाई है।
होर्मुज बना ऊर्जा बाजार की बड़ी चिंता
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान संघर्ष के दौरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को लेकर जोखिम और व्यवधान ने एशिया समेत दुनिया के कई बाजारों में ऊर्जा सुरक्षा की चिंता बढ़ाई है। हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि होर्मुज के रास्ते तेल प्रवाह में कुछ सुधार के बावजूद बाजार अभी भी भू-राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

कच्चे तेल से ज्यादा रिफाइंड ईंधन की चिंता
इस संकट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दबाव केवल कच्चे तेल की उपलब्धता पर नहीं है। रूस और पश्चिम एशिया की कुछ रिफाइनरियों में व्यवधान के कारण डीजल और अन्य रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। विश्लेषणों में रिफाइनिंग क्षमता को मौजूदा वैश्विक ऊर्जा बाजार की प्रमुख बाधाओं में गिना जा रहा है।
डीजल महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता। माल ढुलाई, कृषि मशीनरी, निर्माण, औद्योगिक गतिविधियों और रोजमर्रा की वस्तुओं की परिवहन लागत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यूरोप में डीजल आपूर्ति को लेकर दबाव और कीमतों में तेज वृद्धि की रिपोर्टें सामने आई हैं।

भारत पर भी वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। 25 सितंबर 2026 को दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर दर्ज किया गया।
हालांकि, वैश्विक बाजार में दबाव के बावजूद भारत में खुदरा पेट्रोल-डीजल कीमतें उस तारीख को स्थिर थीं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी को सीधे उसी अनुपात में घरेलू पंप कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
LPG आपूर्ति भी बनी अहम चुनौती
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने LPG सहित अन्य ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए आपूर्ति स्रोतों में विविधता और वैकल्पिक मार्गों की उपलब्धता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाती है।
कूटनीति और सुरक्षित व्यापार मार्ग पर जोर
ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा। सुरक्षित समुद्री मार्ग, रिफाइनरी संचालन की बहाली और संघर्षों में कमी भी महत्वपूर्ण हैं। होर्मुज से तेल प्रवाह में सुधार और क्षेत्रीय तनाव में कमी बाजार पर दबाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल दुनिया की नजर युद्ध के अगले घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति पर बनी हुई है। अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबा चलता है, तो इसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित न रहकर परिवहन, खेती, उद्योग और महंगाई तक पहुंच सकता है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के साथ आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।





