छत्तीसगढ़ में बारिश का सितम- बस्तर बना टापू, सरगुजा से मैदानी इलाकों तक त्राहिमाम

इंद्रावती समेत प्रदेश की प्रमुख नदियां उफान पर- कई गांव और शहर मुख्यालय से कटे- गंगरेल बांध के 14 गेट खोले गए- राहत शिविरों में पहुंचाए गए लोग
छत्तीसगढ़ – सितंबर के आखिरी दौर में छत्तीसगढ़ में बारिश ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बस्तर में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाके टापू में तब्दील हो गए हैं। अनेक गांवों और शहरों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। वहीं सरगुजा संभाग में भी लगातार बारिश ने परेशानी बढ़ा दी है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई निचले इलाकों में पानी घुसने से लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है।

छत्तीसगढ़ मे लगातार हो रही बारिश का असर शहरों से लेकर गांवों तक दिखाई दे रहा है। कई शहरी इलाकों में घरों और सड़कों पर पानी भर गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में खेत, सड़क और बस्तियां जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में भी पानी की आवक तेजी से बढ़ी है। महानदी और शिवनाथ नदी समेत कई नदियां उफान पर हैं। धमतरी के गंगरेल बांध में जलभराव बढ़ने के बाद 14 गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है। कोरिया जिले में भी कई बांध 100 प्रतिशत तक लबालब होने की जानकारी हैं।

बारिश के चलते प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। अधिक बारिश को देखते हुए कई स्थानों पर स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। बस्तर में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं।

इस बीच मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दो दिनों में बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में नदी-नालों और जलाशयों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने लोगों से नदी-नालों, बांधों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि आवश्यक न हो तो बारिश के दौरान यात्रा करने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

कहा जा रहा है कि सितंबर के अंतिम दिनों में हुई इस मूसलाधार बारिश ने प्रदेश के कई हिस्सों में पुराने बारिश के आंकड़ों और रिकॉर्ड को भी प्रभावित किया है। फिलहाल शासन-प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर के बीच लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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