सूरजपुर डबल मर्डर के बाद बड़ा सवाल: पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं तो उनके परिवार की सुरक्षा कौन करेगा?

फास्ट ट्रैक कोर्ट में पुलिसकर्मी की पत्नी-बेटी की हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो मामले में चार दोषी | 8 अक्टूबर को सजा का ऐलान | पुलिस परिवारों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
छत्तीसगढ़ – अपराधियों से शहर और समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिसकर्मियों के अपने परिवार ही यदि असुरक्षित मकानों में रहने को मजबूर हों, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। सूरजपुर में प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में करीब दो साल बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित चार आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया है। अदालत 8 अक्टूबर को दोषियों को सजा सुनाएगी।

यह मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है, जब सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक के परिवार को निशाना बनाया गया था। मामले में सूरजपुर निवासी कुलदीप साहू पर अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने का आरोप था। न्यायालय ने कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी, फूल सिंह और आर्यन विश्वकर्मा को दोषी पाया है।

अपराधियों को सजा के साथ व्यवस्था पर भी हो मंथन-

सूरजपुर की इस घटना ने एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल सामने ला दिया है—जो पुलिसकर्मी दिन-रात दूसरों की सुरक्षा में तैनात हैं, उनके परिवारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

क्योंकि प्रदेश के कई जिलों में पुलिसकर्मियों के लिए अभी भी पर्याप्त पुलिस कॉलोनियां नहीं हैं। कहीं आवास उपलब्ध नहीं हैं तो कहीं पुराने और जर्जर सरकारी मकानों की स्थिति चिंता बढ़ाती है। ऐसे में पुलिसकर्मी किराये के असुरक्षित मकानों में रहने को मजबूर होते हैं।

हर जिले में सुरक्षित पुलिस कॉलोनी अब जरूरत, विकल्प नहीं-

पुलिस की जोखिम भरी कार्यप्रणाली पर नजर रखने वालों का कहना है कि यदि प्रत्येक जिले में पुलिसकर्मियों के लिए सुरक्षित परिसर, मजबूत बाउंड्री, प्रवेश-नियंत्रण और आवश्यक सुरक्षा सुविधाओं से युक्त पुलिस कॉलोनी उपलब्ध हो, तो परिवारों की सुरक्षा को लेकर जोखिम काफी कम किया जा सकता है। और अब सूरजपुर जैसी घटना के बाद यह केवल आवास का विषय नहीं, बल्कि पुलिस परिवारों की सुरक्षा और पुलिस बल के मनोबल से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

पुलिस विभाग मे लम्बा कार्यकाल गुजार चुके वरिष्ठ अधिकारियो का मानना है कि शासन और प्रशासन को अब केवल घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित न रहकर पुलिसकर्मियों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास की जिला-स्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।नहीं तो इस घटना से पुलिस के मनोबल पे पड़ने वाले असर से इंकार नहीं किया जा सकता है

छत्तीसगढ़ मे सवाल अब यही है—क्या सरकार हर जिले में पुलिस कॉलोनी और सुरक्षित आवास की अनिवार्य व्यवस्था करेगी, ताकि भविष्य में किसी पुलिसकर्मी के परिवार की जान असुरक्षित आवास की मजबूरी के कारण जोखिम में न पड़े?

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