बहरासी में हाथी का आतंक: भैंसो की मौत, मकान क्षतिग्रस्त; वन विभाग की ‘सावधान रहें’ नीति पर सवाल

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ वन मंडल के वन परिक्षेत्र बहरासी अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़वार में हाथी की मौजूदगी ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। आक्रोशित हाथी ने बाड़े में बंधे एक भैंस के बच्चे को मार डाला, वहीं एक मकान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है।

सिर्फ चेतावनी से कब तक चलेगा काम?

हाथियों की लगातार मौजूदगी के बावजूद वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को अब भी मुख्य रूप से “सावधान रहें, हाथी से दूर रहें” जैसी पारंपरिक सलाह दी जा रही है। सवाल यह है कि जब हाथी आबादी के भीतर पहुंचकर पशुओं को नुकसान पहुंचा रहा है और मकानों को क्षतिग्रस्त कर रहा है, तब केवल चेतावनी जारी करना ही पर्याप्त क्यों माना जा रहा है?

एमसीबी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही पहले भी लोगों और पालतू पशुओं के लिए खतरा पैदा करती रही है। ऐसे में वन विभाग की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद सूचना देने तक सीमित नहीं रह सकती। संवेदनशील गांवों में समय रहते निगरानी, त्वरित सूचना और बचाव व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है।

हाथी के व्यवहार में बदलाव चिंता का विषय-

पशु विशेषज्ञों के अनुसार हाथी सामान्यतः बिना उकसावे के पालतू पशुओं को नुकसान पहुंचाने वाले वन्यजीव नहीं माने जाते। ऐसे पालतू दो भैसो की मौत जैसी घटना हाथी के आक्रामक व्यवहार की गंभीरता को रेखांकित करती है। हालांकि किसी एक घटना के आधार पर हाथी के व्यवहार में स्थायी बदलाव का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन ऐसी घटनाओं को वन विभाग को गंभीरता से दर्ज कर उनका वैज्ञानिक आकलन करना भी अब समय की मांग बन गया है

वहीं ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम जहाँ जरूरी है वहीं
हाथी प्रभावित गांवों में प्रशिक्षित त्वरित प्रतिक्रिया दल, लगातार निगरानी, ड्रोन या कैमरा आधारित ट्रैकिंग, रात्रि गश्त और गांवों तक तत्काल चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रभावित परिवारों को नुकसान का त्वरित सर्वे कर मुआवजा भी समय पर मिलना चाहिए।

वास्तव मे वन विभाग को ग्रामीणों से केवल दूरी बनाए रखने की अपील करने के बजाय हाथी-मानव संघर्ष की रोकथाम के लिए स्थायी और वैज्ञानिक कार्ययोजना लागू करनी होगी। बड़वार की घटना चेतावनी है कि यदि निगरानी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, तो भविष्य में मानव जीवन पर खतरा और बढ़ सकता है।

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