छत्तीसगढ़ में महंगाई का एक और झटका! बस किराए में 40% तक बढ़ोतरी से यात्रियों की जेब पर डाका, सुविधाओं के नाम पर बदहाल बसें!

किराया सुपर डीलक्स का, सफर खटारा बसों में! आखिर यात्रियों को महंगाई की मार कब तक झेलनी पड़ेगी?
छत्तीसगढ़ –  में बस किराए में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की खबर ने आम यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। महंगाई से पहले ही जूझ रहे मध्यमवर्गीय परिवारों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और रोज कमाकर खाने वाले नागरिकों के लिए यह बढ़ोतरी किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है। सवाल यह है कि जब यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, तो क्या उन्हें उसी अनुपात में बेहतर सुविधाएं भी मिल रही हैं?

सुपर डीलक्स के नाम पर वसूली, लेकिन सुविधाओं का क्या?

यात्रियों का आरोप है कि निजी बस संचालक सुपर डीलक्स और अन्य श्रेणियों के नाम पर अधिक किराया वसूलते हैं, जबकि कई बसों की हालत जर्जर, सीटें खराब और साफ-सफाई की व्यवस्था असंतोषजनक रहती है। यात्रियों के मुताबिक, बसों में सुविधाओं का अभाव होने के बावजूद किराए में लगातार बढ़ोतरी का दबाव उन्हीं पर डाला जा रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर किराए के नाम पर वसूली का आधार क्या है?

परिवहन विभाग की निगरानी पर भी सवाल-

यात्रियों ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए व्यापक जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि बसों की नियमित जांच, सुविधाओं की उपलब्धता और निर्धारित मानकों के पालन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। हालांकि, विभागीय मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन इन शिकायतों को नजरअंदाज करना यात्रियों के हितों के साथ अन्याय होगा।

पहले सुविधाओं की जांच, फिर किराया वृद्धि पर फैसला!

यात्रियों की मांग है कि किराया वृद्धि पर पुनर्विचार किया जाए और सभी निजी बसों की व्यापक जांच कराई जाए। बसों की स्थिति, सुरक्षा, साफ-सफाई और घोषित श्रेणी के अनुरूप सुविधाओं का सत्यापन हो। यदि नियमों का उल्लंघन मिले, तो जिम्मेदार संचालकों पर कार्रवाई की जाए।

आखिर परिवहन सेवा जनता की जरूरत है, निजी कमाई का खुला मैदान नहीं। सरकार और परिवहन विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि यात्रियों को महंगे किराए के बदले सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक सफर कब मिलेगा।

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