सरगुजा संभाग में एसईसीएल की खदानों पर कबाड़ियों का आतंक, सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

हथियारों से लैस कबाड़ियों के हमलों से कर्मचारी दहशत में, एसईसीएल प्रबंधन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
छत्तीसगढ़ – सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों में संचालित एसईसीएल की कोयला खदानों में कथित कबाड़ चोरों की गतिविधियां अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। आरोप है कि कबाड़ियों के गिरोह जब चाहें, हथियारों के साथ खदान परिसरों में घुसकर हमला करते हैं और कीमती सामान लूटकर फरार हो जाते हैं। इन घटनाओं से न केवल खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि वहां कार्यरत कर्मचारियों की जान भी खतरे में पड़ रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर खदानों जैसे संवेदनशील औद्योगिक परिसरों में असामाजिक तत्वों की इतनी आसानी से आवाजाही कैसे हो रही है? यदि कर्मचारियों पर हमले हो रहे हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है, तो एसईसीएल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है? क्या केवल औपचारिक सुरक्षा इंतजामों के भरोसे करोड़ों रुपये की संपत्ति और कर्मचारियों की जिंदगी सुरक्षित रखी जा सकती है?

पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल-

कथित कबाड़ चोरों के बढ़ते हौसले सरगुजा संभाग की कानून-व्यवस्था के सामने भी चुनौती पेश कर रहे हैं। यदि इन घटनाओं की शिकायतें सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, तो पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा आवश्यक है। आखिर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी है, या निगरानी व्यवस्था में कोई बड़ी खामी है?

क्षेत्र में यह चर्चा भी उठती है कि क्या प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के कारण ऐसे तत्व बेखौफ हैं? हालांकि, ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।

जवाबदेही तय करना जरूरी-

एसईसीएल प्रबंधन को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं, पुलिस को कथित हमलों और चोरी की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इससे एसईसीएल की प्रतिष्ठा और सरगुजा संभाग की कानून-व्यवस्था, दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अब सवाल यही है—कर्मचारियों की सुरक्षा और सरकारी संपत्ति की रक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा?

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