IIT Bhilai का बड़ा इनोवेशन: प्लास्टिक बोतलों के कचरे से बनेगी हाई-वैल्यू इंजीनियरिंग सामग्री, 3D प्रिंटिंग में इस्तेमाल की संभावना
भिलाई, छत्तीसगढ़ | टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन डेस्क | 26 अगस्त 2026
प्लास्टिक प्रदूषण दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में शामिल है। हर साल बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा निकलता है, जिसमें पानी और अन्य पेय पदार्थों की PET बोतलें भी बड़ी मात्रा में शामिल हैं। अब इसी प्लास्टिक कचरे को उपयोगी इंजीनियरिंग सामग्री में बदलने की दिशा में IIT Bhilai के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकास किया है।
भारत सरकार के Press Information Bureau (PIB) की 3 अगस्त 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, IIT Bhilai की शोध टीम ने इस्तेमाल हो चुकी Polyethylene Terephthalate यानी PET प्लास्टिक बोतलों को एक ऐसी हाई-वैल्यू इंजीनियरिंग सामग्री में बदलने की तकनीक विकसित की है, जिसे दोबारा आकार दिया जा सकता है, मरम्मत की जा सकती है और बार-बार पुनः संसाधित किया जा सकता है। इस सामग्री में भविष्य में 3D Printing जैसी एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों में इस्तेमाल की संभावना बताई गई है।
यूकेलिप्टस की पत्तियों से बना Green Catalyst
इस खबर का एक और दिलचस्प पहलू इसका green catalyst है।
PIB की जानकारी के अनुसार शोध में eucalyptus leaves से विकसित catalyst का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य PET आधारित सामग्री के रूपांतरण की प्रक्रिया को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करना है।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक रीसाइक्लिंग में केवल प्लास्टिक को दोबारा इस्तेमाल करना ही पर्याप्त नहीं है। वैज्ञानिक यह भी देखते हैं कि पूरी प्रक्रिया में ऊर्जा की खपत, रसायनों का उपयोग, लागत और पर्यावरणीय प्रभाव कितना है।






