छत्तीसगढ़ में मौसमी बीमारियों का ट्रिपल अटैक: स्वाइन फ्लू के मरीज बढ़े, कोरोना ने भी दी दस्तक, वायरल से अस्पताल फुल

[1:40 am, 06/09/2026] Shukla jee pori: लक्षण एक जैसे होने से डॉक्टर भी भ्रम में, स्वास्थ्य मंत्री बोले – घबराने की जरूरत नहीं, अस्पतालों में व्यवस्था पूरी

छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही बीमारियों ने भी रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश के लगभग सभी जिलों में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच कुछ मरीजों में कोरोना के लक्षण मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ा गई है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक पखवाड़े में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव मेडिकल कॉलेजों में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की संख्या में 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। कई मरीजों को सांस लेने में तकलीफ और लगातार तेज बुखार के कारण ICU में भर्ती करना पड़ा है।

तीनों बीमारियों के लक्षण एक जैसे, इसलिए भ्रम-

डॉक्टरों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या लक्षणों को लेकर है। स्वाइन फ्लू, वायरल फीवर और कोरोना तीनों के शुरुआती लक्षण लगभग एक जैसे हैं –

– तेज बुखार और ठंड लगना
– लगातार सूखी खांसी
– गले में खराश
– बदन दर्द और थकान
– सांस लेने में तकलीफ और घबराहट

प्रदेश मे शासकीय व निजी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है, बीमारियों के लक्षण एक जैसे होने से निश्चित रूप से चिकित्स्कों के साथ मरीजों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है “मरीज वायरल समझकर घर पर दवा ले रहे हैं, जब स्थिति बिगड़ती है तब जांच में स्वाइन फ्लू या कोरोना निकल रहा है। लक्षण एक जैसे होने के कारण कई जगह भ्रम की स्थिति बन रही है। इसलिए 3 दिन से ज्यादा बुखार या सांस फूलने पर तुरंत स्वाइन फ्लू और कोरोना की जांच जरूरी है माना जा रहा है ।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर –

बताया जाता है कि बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सिविल सर्जनों को अलर्ट जारी किया है। उन्होंने सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और टैमीफ्लू दवा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “प्रदेशवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है। यह मौसमी बीमारी है, हर साल इस मौसम में मामले बढ़ते हैं। सरकार की पूरी तैयारी है। सभी अस्पतालों में इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है।”

हर साल बढ़ता प्रकोप बन रहा जानलेवा-

हालांकि मंत्री के आश्वासन के बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक है। हर साल बारिश के बाद वायरल और स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में जांच की सुविधा न होने से कई मरीज बिना टेस्ट के ही निजी क्लीनिकों में इलाज करा रहे हैं, जिससे मौतों का खतरा बढ़ जाता है। पिछले साल भी स्वाइन फ्लू से प्रदेश में कई मौतें हुई थीं।

बचाव के लिए क्या करें? – डॉक्टरों की सलाह के अनुसार
मौसमी बीमारियों से बचने के लिए निम्न उपाय किया जाना समय की मांग है
1. भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क जरूर लगाएं।
2. खांसी-बुखार होने पर खुद से एंटीबायोटिक न लें।
3. हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं।
4. सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर H1N1 की कराएं।
5. बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाये l क्योंकि स्वास्थ्य प्रकृति का अनमोल उपहार है और रोगों के फैलाव के दौरान बचाव ही सबसे उपाय

About The Author