छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय कैबिनेट पर मंडराया संवैधानिक संकट- 14 मंत्रियों की नियुक्ति को चुनौती- हाईकोर्ट ने 4 हफ्ते में मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों मंत्रियों की परफॉर्मेंस और लचर कार्यप्रणाली को लेकर फेरबदल की चर्चा जोरों पर है। भाजपा आलाकमान असंवेदनशील और कमजोर मंत्रियों को हटाने पर मंथन कर रहा है, इसी बीच विष्णुदेव साय सरकार पर अब कानूनी संकट भी गहरा गया है। कैबिनेट में 14वें मंत्री की नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ मे राजनैतिक आंकड़े बाजो के अनुसार सारी मुसीबत 20 अगस्त 2025 को साय कैबिनेट का दूसरा विस्तार होने और तीन नए मंत्रियों – गजेंद्र यादव, राजेश अग्रवाल और गुरु खुशवंत साहेब को शपथ दिलाने के बाद शुरू हुईं क्योंकि इसके साथ ही मंत्रिमंडल की संख्या 14 हो गई थी

इसी को लेकर दो अलग-अलग याचिकाएं बिलासपुर हाईकोर्ट में दायर की गई हैं जो इस प्रकार थी

1. रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता वासुदेव चक्रवर्ती द्वारा दायर जनहित याचिका व
2. कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला द्वारा दायर वारंटो रिट

इन याचिकाओं में याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया है कि यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 164(1A) का सीधा उल्लंघन है। क्योंकि संविधान के 91वें संशोधन 2003 के अनुसार किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ में 90 विधायक हैं, लिहाजा 90 का 15% = 13.5 होता है, यानी अधिकतम 13 मंत्री ही बन सकते हैं। 14वां मंत्री बनाना असंवैधानिक है।

हाईकोर्ट में अब तक क्या हुआ?

बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ मे राजनीति के इस मैदान मे चल रहे दांव पेंच मे 2 सितंबर को हुई पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने यह कहकर बचाव किया था कि ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश की शिवराज कैबिनेट से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें अनुच्छेद 164(1A) की व्याख्या होनी है, इसलिए इस याचिका पर सुनवाई टाली जाए।

लेकिन कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ है कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने इस दलील को नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मामले की आड़ में अनिश्चितकाल तक सुनवाई नहीं टाली जा सकती।

इससे पहले कोर्ट ने सुशील आनंद शुक्ला की वारंटो याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि जब इसी मुद्दे पर एक PIL पहले से लंबित है, तो दूसरी याचिका भी PIL के तौर पर दायर की जाए और दोनों की एक साथ सुनवाई होगी। अब दोनों याचिकाओं को क्लब कर दिया गया है और सरकार से चार हफ्ते में विस्तृत जवाब-शपथपत्र मांगा गया है।

राजनीतिक मायने-

यह कानूनी दांव ऐसे समय में आया है, जब अंदरखाने कई मंत्रियों के कामकाज से संगठन नाखुश बताया जा रहा है। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए राज्यपाल से भी शिकायत की थी। कहा जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाया था – “क्या 14वें मंत्री के लिए केंद्र से अनुमति ली गई है? अगर नहीं, तो यह कैबिनेट ही असंवैधानिक है।”

वहीं सरकार का बचाव हरियाणा फॉर्मूले पर टिका है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा था कि हरियाणा में भी 90 विधायक हैं और वहां मुख्यमंत्री सहित 14 मंत्री हैं, जो संवैधानिक है। 13.5 को राउंड ऑफ कर 14 माना जा सकता है।

अब देखना होगा कि हाईकोर्ट इस संवैधानिक गणित पर क्या व्याख्या देता है। अगर कोर्ट ने 14वें मंत्री की नियुक्ति को असंवैधानिक माना, तो छत्तीसगढ़ मे साय सरकार को न सिर्फ एक मंत्री को हटाना पड़ेगा, बल्कि यह 2023 के बाद पहली बार बना मिसाल होगा कि छत्तीसगढ़ में 14 सदस्यीय कैबिनेट नहीं चल सकी। फिलहाल गेंद सरकार के पाले में है।

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