वर्दी के पीछे छिपे दर्द को समझने की पहल: कोरिया एसपी हरीश राठौर ने 55 पुलिसकर्मियों को दिया मानसिक मजबूती का संदेश

मनः जागृति अभियान के तहत तनाव प्रबंधन की कार्यशाला, नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों ने किया जागरूक
छत्तीसगढ़ – वर्दी पहनकर दूसरों की सुरक्षा करने वाला पुलिसकर्मी भी आखिर इंसान है। वह भी थकता है, तनाव से गुजरता है और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच मानसिक संघर्ष करता है। ड्यूटी का अनिश्चित समय, लगातार काम का दबाव, छुट्टियों की कमी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और कई बार संसाधनों का अभाव उसके मन पर गहरा असर डाल सकते हैं। ऐसे में कोरिया पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर की पहल पर पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया कदम महत्वपूर्ण है।

छत्तीसगढ़ के कोरिया मे मनः जागृति अभियान के अंतर्गत पुलिस लाइन में जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर के विशेषज्ञों ने लगभग 55 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन कार्यशाला आयोजित की। इसमें चिकित्सा मनोवैज्ञानिक डॉ. सुमन कुमार और मनोचिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ता पुलेंद्र मोहले ने तनाव प्रबंधन, नशामुक्ति, मोबाइल की लत से बचाव तथा मानसिक समस्याओं के समय पर समाधान की जानकारी दी।

दबाव में ड्यूटी, भीतर चलती मानसिक जंग-

इस संबंध मे जानकार कहते है कि पुलिसकर्मियों को अक्सर विपरीत परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेना पड़ता है। अपराध, दुर्घटनाओं और संवेदनशील घटनाओं से लगातार सामना, पर्याप्त आराम का अभाव तथा परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाना मानसिक थकान बढ़ा सकता है। जब तनाव लंबे समय तक बना रहे और व्यक्ति अपनी परेशानी साझा न कर पाए, तो चिंता, अवसाद और निराशा जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। कुछ मामलों में व्यक्ति आत्मघाती विचारों तक पहुंच सकता है। इसलिए समय रहते पहचान, संवाद और विशेषज्ञों की मदद बेहद जरूरी है।

कोरिया मे आयोजित इस विशेष कार्यशाला मे पुलिस अधिकारियो व जवानो को योग, प्राणायाम, ध्यान, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, सकारात्मक सोच और समय प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई। साथ ही भारत सरकार की टेली-मानस सेवा के टोल-फ्री नंबर 14416 की जानकारी देते हुए बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता चौबीसों घंटे उपलब्ध है।

संवेदनशील पुलिसिंग की दिशा में जरूरी कदम-

पुलिसकर्मियों की मानसिक सेहत पर ध्यान देना केवल कर्मचारी कल्याण नहीं, बल्कि बेहतर पुलिसिंग और सुरक्षित समाज से भी जुड़ा है। ऐसी कार्यशालाएं तनाव की पहचान, नशे से दूरी, आपसी संवाद और समय पर उपचार लेने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकती हैं। एसपी हरीश राठौर की इस पहल का महत्व इसलिए भी है कि वर्दीधारियों की समस्याओं को भी गंभीरता से समय रहते समझा जाए। वहीं जरूरत है कि ऐसी पहल निरंतर जारी रहे, ताकि पुलिसकर्मी मानसिक रूप से मजबूत रहते हुए अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभा सकें।

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