मनेन्द्रगढ़–केल्हारी मार्ग पर बस हादसा: छह मौतें, 30 से अधिक घायल; आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?

क्षमता से अधिक सवारी, संकरी सड़क और तेज रफ्तार का खतरनाक मेल; हादसे के बाद सक्रियता नहीं, दुर्घटना से पहले जवाबदेही जरूरी
छत्तीसगढ़ – के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में मनेन्द्रगढ़-केल्हारी मार्ग पर राज बस की दुर्घटना ने एक बार फिर यात्री परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छह लोगों की मौत और 30 से अधिक यात्रियों के घायल होने की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। मृतकों में बस मालिक सिपाही लाल के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि त्योहार के दौरान सीमित सीटों वाली बस में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया गया था। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सवाल है कि क्या यह हादसा महज एक दुर्घटना थी या लापरवाही की उन कड़ियों का परिणाम, जिन्हें समय रहते रोका जा सकता था?

संकरी सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ती बसें, निर्धारित सीटों से अधिक यात्रियों को ठूंसना और यात्रियों को बैठाने के लिए बस संचालकों के बीच मची प्रतिस्पर्धा किसी बड़े हादसे को निमंत्रण देने से कम नहीं है। यदि बस में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां थीं और वाहन तेज गति से चल रहा था, तो इन पहलुओं की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। पेड़ से टकराकर बस का दुर्घटनाग्रस्त होना भी वाहन की गति, चालक के नियंत्रण और सड़क की परिस्थितियों की जांच की मांग करता है।

आखिर जिम्मेदार कौन?

बस मालिकों के लिए यात्री केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हैं। चालक के लिए समय पर गंतव्य तक पहुंचने से अधिक महत्वपूर्ण यात्रियों की जान है। वहीं, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे बसों की फिटनेस, परमिट, निर्धारित यात्री क्षमता, गति नियंत्रण और सड़क सुरक्षा नियमों का नियमित पालन सुनिश्चित करें। त्योहारों के दौरान अतिरिक्त निगरानी क्यों नहीं की गई, इसकी भी पड़ताल होनी चाहिए।

दुर्घटना के बाद प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का सक्रिय होना राहत की बात है, लेकिन असली परीक्षा हादसे से पहले की सतर्कता में है। घायलों का उपचार और पीड़ित परिवारों को सहायता देना जरूरी है, मगर भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।

अब सवाल नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए। ओवरलोडिंग पर सख्ती, तेज रफ्तार पर निगरानी, नियमित जांच और खतरनाक मार्गों पर सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। बस हादसे की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।

आखिर यात्रियों की जिंदगी इतनी सस्ती क्यों मानी जाए कि हर हादसे के बाद कुछ दिन शोक मनाया जाए और फिर वही लापरवाही सड़कों पर लौट आए? मनेन्द्रगढ़-केल्हारी मार्ग पर उठे ये सवाल पूरे परिवहन तंत्र के लिए चेतावनी हैं। अब भी नहीं जागे, तो अगली दुर्घटना केवल एक और खबर बनकर रह जाएगी।

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