सरगुजा में कांग्रेस का संगठन सृजन – क्या बूथ की ताकत से लौटेगा कांग्रेस का खोया किला?

छत्तीसगढ़ – अंबिकापुर में कांग्रेस के तीन दिवसीय संगठन सृजन अभियान ने छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या कांग्रेस ने आखिरकार समझ लिया है कि चुनाव केवल बड़े नेताओं के भाषणों से नहीं, बूथ पर खड़े कार्यकर्ता से जीते जाते हैं?

पता हो 2023 में सरगुजा संभाग की 14 की 14 विधानसभा सीटें भाजपा के खाते में चली गई थीं।जबकि यह वही सरगुजा है, जहां 2018 में कांग्रेस ने सभी 14 सीटों पर जीत दर्ज कर राजनीतिक इतिहास रचा था।

अब अंबिकापुर के शिविर में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने संगठन को लेकर कांग्रेस की गंभीरता जरूर दिखाई है। यहाँ छह जिलों के 49 ब्लॉक अध्यक्ष और 12 मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण देकर संगठन को बूथ तक सक्रिय करने पर जोर दिया गया।
लेकिन असली परीक्षा शिविर के मंच पर नहीं, मैदान में होगी।

छत्तीसगढ़ की राजनीती को करीब से जानने वालों का कहना है कि सवाल यह है कि क्या प्रशिक्षण के बाद हर बूथ पर कांग्रेस का सक्रिय नेटवर्क खड़ा होगा? क्या स्थानीय कार्यकर्ता और बड़े नेताओं के बीच दूरी घटेगी? और सबसे अहम—क्या पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच संगठनात्मक तालमेल इतना मजबूत होगा कि व्यक्तिगत प्रभाव से ऊपर सामूहिक रणनीति दिखाई दे?

इसी प्रकारकहा जा रहा है कि कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ भाजपा से मुकाबले की नहीं, बल्कि अपने ही संगठन में भरोसा, संवाद और अनुशासन बहाल करने की है। अंबिकापुर का शिविर शुरुआत हो सकता है, लेकिन इसे राजनीतिक वापसी में बदलने के लिए लगातार जमीनी काम जरूरी होगा।

क्योंकि 14 सीटों की हार ने कांग्रेस को जो सबक दिया है, उसकी असली परीक्षा अगली विधानसभा तक चलेगी। बूथ मजबूत हुआ तो कहानी बदलेगी, वरना यह शिविर भी भाषणों और संकल्पों तक सिमटकर रह जाएगा।ऐसा राजनीति शास्त्र के जानकार कहते है

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