कांग्रेस में ‘घर वापसी’ की फाइल फिर खुली, 36 नामों पर मंथन; जोगी परिवार पर फैसला बाकी

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने करीब दो साल बाद पार्टी से निष्कासित या अलग राह पकड़ चुके नेताओं की वापसी की कवायद फिर तेज कर दी है। प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक में ऐसे 36 नेताओं के मामलों पर चर्चा हुई। कुछ प्रकरणों में वापसी का रास्ता साफ करने के संकेत मिले हैं, जबकि कई मामलों में जिला संगठन से रिपोर्ट और अभिमत मांगा गया है। करीब 15-16 आवेदन खारिज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा नजर पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के परिवार से जुड़े मामले पर है। रेणु जोगी और अमित जोगी की ओर से जोगी कांग्रेस के कांग्रेस में विलय और कांग्रेस में वापसी का प्रस्ताव पहले भी सामने आ चुका है। फिलहाल अनुशासन समिति ने इस मामले को लंबित रखा है। यानी जोगी परिवार की वापसी पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

बताया जाता है कि कांग्रेस के लिए यह प्रक्रिया महज निष्कासित नेताओं की वापसी का मामला नहीं, बल्कि अनुशासन और संगठन विस्तार के बीच संतुलन की परीक्षा भी है। एक ओर पुराने नेताओं और उनके समर्थकों की वापसी से संगठन का सामाजिक और राजनीतिक आधार बढ़ सकता है, वहीं दूसरी ओर बिना स्पष्ट अनुशासनात्मक कसौटी के वापसी से पार्टी के भीतर असंतोष और गुटीय खींचतान की आशंका बनी रह सकती है।

राजनैतिक नजर से देखे तो छत्तीसगढ़ की राजनीति में जोगी परिवार का अलग राजनीतिक प्रभाव रहा है। ऐसे में अमित जोगी और रेणु जोगी की वापसी का निर्णय सामान्य घर वापसी से अलग राजनीतिक महत्व रखता है। कांग्रेस फिलहाल छोटे और कम विवादित मामलों में निर्णय लेकर संगठनात्मक प्रतिक्रिया को परखती नजर आ रही है।

कांग्रेस खेमे से आ रही खबरों के अनुसार अब निगाहें प्रस्तावित प्रदेश संगठन की बैठक और नए प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के दौरे पर हैं। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि कांग्रेस ‘घर वापसी’ को सीमित अनुशासनात्मक प्रक्रिया रखती है या इसे व्यापक संगठनात्मक पुनर्समावेशन का रूप देती है।

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