रायपुर सेंट्रल जेल के बंदियों ने बनाई 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं, विसर्जन के बाद उगेंगे पौधे
अपराध की सजा काट रहे हाथों ने इस बार ऐसी प्रतिमाएं गढ़ी हैं, जिनमें आस्था के साथ बदलाव और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी छिपा है। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने गणेशोत्सव के लिए करीब 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। प्राकृतिक मिट्टी से बनी इन प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज डाले गए हैं। प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद अनुकूल परिस्थितियों में यही बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकते हैं।
इस पहल की खास बात यह है कि प्रतिमाएं तैयार करने वाले बंदियों ने अपने हुनर को सकारात्मक दिशा दी है। करीब 10 बंदियों ने कई महीनों की मेहनत और रचनात्मकता से एक से दो फीट आकार की इन प्रतिमाओं को तैयार किया। प्राकृतिक मिट्टी और रंगों के इस्तेमाल से इन्हें पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है।

जेल की चारदीवारी के भीतर चल रहा यह काम केवल मूर्ति निर्माण तक सीमित नहीं है। यह बंदियों के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी हिस्सा है। गंभीर अपराधों में सजा काट रहे बंदियों के लिए हुनर सीखना और अपनी रचनात्मकता को उपयोगी काम में लगाना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकता है।
इन प्रतिमाओं में मिट्टी के साथ बीजों का समावेश इस पहल को और खास बनाता है। गणेशोत्सव के बाद जहां सामान्य प्रतिमाओं का सफर विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है, वहीं इन प्रतिमाओं के जरिए हरियाली का नया सफर शुरू होने की उम्मीद है।

रायपुर केंद्रीय जेल की यह पहल यह संदेश देती है कि सुधार की राह जेल की सलाखों के भीतर से भी निकल सकती है। हुनर को अवसर मिले तो वही हाथ, जिनसे कभी अपराध हुआ, समाज और पर्यावरण के लिए उपयोगी सृजन भी कर सकते हैं।





