IRCTC घोटाले में लालू परिवार पर शिकंजा अदालत की सख्ती से बिहार की सियासत गरम

बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में शामिल लालू प्रसाद यादव का परिवार एक बार फिर गंभीर कानूनी मुश्किलों के केंद्र में है। IRCTC होटल मामले में दिल्ली की अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत की टिप्पणी ने इस मामले को महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से निकालकर न्यायिक जांच के गंभीर पड़ाव पर ला खड़ा किया है।

मामला उस दौर का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि रेलवे के होटल टेंडर में कथित अनियमितताओं के बदले जमीन के लेन-देन का रास्ता बनाया गया। अदालत ने प्रथमदृष्टया यह माना है कि लालू यादव पर पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों पर मुकदमा आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार है।

इसी बीच जमीन के बदले नौकरी मामले में भी लालू यादव को अदालतों से राहत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में CBI की FIR और उससे जुड़ी चार्जशीट को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिका में मेरिट नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी CBI मामले की कार्यवाही रोकने से इनकार किया।

राजनीतिक रूप से इसका असर बिहार से कहीं आगे तक जा सकता है। लालू परिवार के खिलाफ चल रहे मामलों में न्यायिक सख्ती RJD की राजनीति, नेतृत्व और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर सवाल खड़े करती है। हालांकि अंतिम दोषसिद्धि अभी नहीं हुई है और आरोपों का परीक्षण मुकदमे में होना बाकी है।

अब सवाल सिर्फ लालू परिवार की कानूनी लड़ाई का नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या सत्ता में रहते पद और सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग पर कानून का शिकंजा राजनीतिक हैसियत से ऊपर रहेगा? राजनैतिक जानकर कहते है आने वाले दिनों में अदालत की ये कार्रवाई बिहार की राजनीति की दिशा पर भी गहरा असर डाल सकती है।

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