पहाड़ दे रहे धोखा, केदारनाथ की राह जोखिम भरी; हेलमेट के बिना एंट्री नहीं

देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा आस्था के साथ अब सतर्कता की भी परीक्षा बन गई है। केदारनाथ धाम का पैदल मार्ग लगातार भूस्खलन, पत्थर और मलबा गिरने की घटनाओं के चलते संवेदनशील बना हुआ है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक करीब 21 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर 13 डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं।

पर्वतीय चीरबासा क्षेत्र में पहाड़ी से पत्थर गिरने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। ताजा घटनाक्रम में संवेदनशील हिस्से से गुजरने वाले श्रद्धालुओं को हेलमेट पहनाकर ही आगे भेजा जा रहा है। यात्रियों को नियंत्रित समूहों में सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की गई है।

उत्तराखंड मे जंगलचट्टी, रामबाड़ा, भीमबली सहित कई हिस्से पहले से भूस्खलन प्रभावित और संवेदनशील माने जाते हैं। बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के बीच हर कदम सावधानी से उठाना जरूरी है।

उत्तराखंड मे सिर्फ केदारनाथ ही नहीं, यमुनोत्री पैदल मार्ग और चारधाम को जोड़ने वाले हाईवे भी भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र हैं। पहाड़ की खूबसूरती के बीच बदलता मौसम और कमजोर होती चट्टानें यात्रियों के लिए चुनौती बन रही हैं।

हालांकि राज्य और केंद्र सरकार की ओर से यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, संचार, यातायात और यात्रा मार्गों की निगरानी को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित यात्रा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। केंद्र स्तर पर चारधाम हेलीकॉप्टर संचालन में सुरक्षा मानकों और ग्राउंड-हैंडलिंग व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।

पर हकीकत अब यही बताई जा रही है कि आस्था अटूट है, लेकिन पहाड़ों का मिजाज बदल रहा है। ऐसे में चारधाम यात्रा में श्रद्धा के साथ सावधानी, प्रशासन के निर्देशों का पालन और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल ही सबसे बड़ा कवच बन गया है।

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