सरगुजा संभाग में बढ़ रही गला काटकर आत्महत्या की प्रवृत्ति- दो साल में 28 लोगों की बची जान

शासकीय मेडिकल कॉलेज में 10 जटिल ऑपरेशन सफल- तनाव और पारिवारिक कलह बनी बड़ी वजह, -विशेषज्ञ बोले – तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी-
सरगुजा (छत्तीसगढ़ )

सरगुजा संभाग में गला काटकर आत्महत्या करने के प्रयास के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालात यह हैं कि पिछले एक साल में ही अंबिकापुर के राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के नाक, कान, गला विभाग में ऐसे 28 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 10 मरीजों का सफल ऑपरेशन कर उनकी जान बचाई गई।

मेडिकल कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार बीते दिनों एक 21 वर्षीय युवती और एक युवक द्वारा गला काटकर आत्महत्या के प्रयास का मामला सामने आया था। समय पर अस्पताल पहुंचने से चिकित्सकों की टीम ने उनकी श्वास नली और रक्त वाहिनियों को जोड़कर जीवन बचा लिया।

तनाव बना कारण, तत्काल मदद जरूरी-

नाक कान गला विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे अधिकतर मामले मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद, आर्थिक परेशानी और अवसाद के कारण सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि गले पर चोट लगने पर सबसे महत्वपूर्ण होता है कि मरीज को तत्काल नजदीकी बड़े अस्पताल पहुंचाया जाए, ताकि श्वास नली को बचाया जा सके और ज्यादा खून बहने से रोका जा सके।

इन जटिल ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक करने पर कॉलेज प्रबंधन और सरगुजा संभाग के स्वास्थ्य विभाग ने ईएनटी विभाग के डॉ. अनिल कुमार, डॉ. विकास जैन सहित पूरी टीम को बधाई भी लोगो व संस्थाओ द्वारा मिली है।पता हो पिछले वर्ष 2025 से मई 2026 तक कुल 18 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया।
इस मसले पर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परिवार या आसपास कोई भी व्यक्ति तनाव में दिखे तो उसे अकेला न छोड़ें, तत्काल परिजनों और चिकित्सक से संपर्क करें। आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है।

सरगुजा ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ में ऐसे मामलों में इजाफा देखा जा रहा है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग में भी मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में काउंसलिंग के केस बढ़े हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों में काउंसलिंग की सुविधा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

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