जेल की सलाखों से लेकर गांव की चौपाल तक दिखा रिश्तों का बंधन ,रक्षाबंधन
प्रदेश में रक्षाबंधन का पर्व महानगरों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। क्या आम क्या खास, पूरा प्रदेश राखी के रंग में रंगा नजर आया। सुबह से ही बहनों ने उपवास रखकर थाल सजाए, धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, आरती उतारी और लंबी उम्र की कामना की। बाजारों में सुबह से ही मिठाइयों और राखियों की दुकानों पर भीड़ उमड़ी रही।
रक्षाबंधन पर सबसे भावुक तस्वीर प्रदेश की जेलों से सामने आई। रायपुर सेंट्रल जेल के साथ-साथ बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर, अंबिकापुर और रायगढ़ जिला जेलों में बहनें अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए सुबह 7 बजे से ही कतारों में खड़ी नजर आईं।

रायपुर सेंट्रल जेल में प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। जेल नियमों के अनुसार तलाशी और पर्ची सिस्टम के बाद बहनों को अंदर प्रवेश दिया गया। तपती धूप और उमस के बावजूद सैकड़ों बहनें कई कई घंटे तक लाइन में खड़ी होकर अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। हाथों में राखी, मिठाई और कुंकुम का थाल लिए कई बहनों की आंखें अपने भाई को देखकर भर आईं।
जेल अधिकारियों के अनुसार रायपुर सेंट्रल में ही 800 की संख्या मे बहनों ने राखी बांधी। कई बहनें अपने छोटे बच्चों के साथ आई थीं। बिलासपुर जिला जेल में करीब 400 और अंबिकापुर में 250 से अधिक राखियां बंधीं। इस दौरान भावुक पल भी दिखे, जब कई वर्षों से सजा काट रहे भाइयों की कलाई पर राखी बंधते ही बहनें फफक कर रो पड़ीं। भाइयों ने भी बहनों को रक्षा का वचन दिया






